द्वाराहाट। बिपिन त्रिपाठी कुमाऊँ प्रौद्योगिकी संस्थान (बीटीकेआईटी) द्वाराहाट के दैनिक एवं नियत वेतनभोगी कर्मचारी अपनी एक सूत्रीय मांग विनियमितिकरण (स्थायी नियुक्ति) को लेकर लगातार नौवें दिन भी आंदोलन पर डटे रहे। कर्मचारियों ने संस्थान के प्रशासनिक भवन में संगठन के बैनर तले शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जारी रखते हुए शासन और प्रशासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की धरनास्थल पर कर्मचारियों ने कहा कि वे वर्षों से संस्थान की सेवाओं में कार्यरत हैं और संस्थान के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद आज तक उन्हें विनियमितिकरण का लाभ नहीं मिल पाया है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है।
कर्मचारियों ने बताया कि संस्थान के निदेशक द्वारा 11 जून 2026 को उनकी मांगों के संबंध में एक प्रस्ताव माननीय तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत तथा शासन के सचिव स्तर पर अनुमोदन के लिए भेजा गया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि शासन स्तर से इस प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाएगी। उन्होंने तकनीकी शिक्षा मंत्री और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि कर्मचारियों के हितों को देखते हुए जल्द से जल्द अनुमोदन प्रदान किया जाए।
धरना दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि संस्थान में वर्तमान समय में कई पद रिक्त पड़े हुए हैं। ऐसे में विनियमितिकरण की प्रक्रिया पूरी करने में देरी समझ से परे है। कर्मचारियों ने इस स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जब सभी आवश्यक परिस्थितियां अनुकूल हैं तो फिर कर्मचारियों को उनका अधिकार देने में विलंब क्यों किया जा रहा है। आंदोलनकारियों ने अन्य संस्थानों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। उनका कहना है कि पौड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज घुड़दौड़ी में उनके समान दैनिक एवं नियत वेतनभोगी कर्मचारियों को वर्ष 2013 की विनियमितिकरण नियमावली के तहत स्थायी नियुक्ति प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त पंतनगर विश्वविद्यालय में 147 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों तथा जिला पूर्ति कार्यालय अल्मोड़ा में भी कर्मचारियों को इसी नियमावली के आधार पर विनियमितिकरण का लाभ मिल चुका है। ऐसे में बीटीकेआईटी के कर्मचारियों को अब तक इस लाभ से वंचित रखा जाना उनके साथ अन्याय है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि वे फिलहाल शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन यदि समय रहते उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो उन्हें आंदोलन को उग्र रूप देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक शासन से विनियमितिकरण संबंधी अंतिम अनुमोदन प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरने के दौरान कर्मचारियों ने शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से भी समर्थन की अपील की। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए सभी पक्षों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
आंदोलन को क्षेत्र के सामाजिक एवं जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी मिलने लगा है। रविवार को भूमि अध्यात्म संघर्ष समिति के अध्यक्ष देव सिंह रावत तथा पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य रतन कुमार ने धरनास्थल पहुंचकर कर्मचारियों के आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने कर्मचारियों की मांग को न्यायोचित बताते हुए शासन से शीघ्र समाधान निकालने की अपील की। धरना-प्रदर्शन में संगठन के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह रावत सहित दिवान सिंह रावत, कुन्दन रावत, विनेश, सावित्री देवी, नरेश कुमार, धन सिंह अधिकारी, पुष्पा मठपाल, रुबी देवी, जसूली देवी, मदनपाल, कमल सिंह बजेठा, रमेश मठपाल, खजान चन्द्र नौगाई, गोपाल उपाध्याय, दयाल गिरी, गणेश अधिकारी, दीपक बजेठा एवं नित्यानंद उप्रेती सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।
