बागेश्वर: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में एक बार फिर धरती डोल गई। शुक्रवार सुबह बागेश्वर जिले और आसपास के इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.4 मापी गई है। राहत की बात यह है कि अभी तक कहीं से भी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं आई है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (एनएससी) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 07:48:37 बजे आया। इसका केंद्र बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र में जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था। सुबह-सुबह के इस हादसे से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग घबराहट में अपने घरों से बाहर निकल आए। कईयों ने घरों की छतों और दीवारों को जांचा, लेकिन सब कुछ सामान्य पाया गया।
उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण भूकंप प्रवण इलाका है। यह राज्य टेक्टोनिक प्लेट्स की टक्कर का केंद्र रहा है, जहां इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट से लगातार टकरा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि 3.4 तीव्रता का भूकंप हल्का श्रेणी का होता है, जो सामान्यतः नुकसान नहीं पहुंचाता। फिर भी, कपकोट जैसे दुर्गम क्षेत्र में झटके महसूस होने से स्थानीय लोग सतर्क हो गए। बागेश्वर जिला प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी। एसडीएम और पुलिस टीमों ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया, लेकिन कोई क्षति न होने पर राहत की सांस ली गई।यह घटना राज्य में हाल के वर्षों में आए भूकंपों की याद दिला गई।
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2011 में उत्तराखंड में 6.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। उसके बाद से छोटे-मोटे झटके बार-बार महसूस हो रहे हैं। 2023 में भी चमोली और रुद्रप्रयाग में कई हल्के भूकंप दर्ज किए गए थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिमालय क्षेत्र में प्रतिवर्ष सैकड़ों छोटे भूकंप आते हैं, जो बड़े भूकंप का दबाव कम करने में मदद करते हैं। कपकोट क्षेत्र टिहरी गढ़वाल और पिथौरागढ़ के निकट है, जहां भूगर्भीय गतिविधियां सक्रिय रहती हैं। एनएससी के डेटा से पता चलता है कि पिछले एक वर्ष में उत्तराखंड में 3.0 से अधिक तीव्रता के 20 से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं।स्थानीय निवासियों ने बताया कि झटके करीब 5-7 सेकंड तक महसूस हुए। एक किसान राम सिंह ने कहा, “सुबह चाय पी रहा था, अचानक सब कुछ हिलने लगा। हम सब बाहर भाग आए। भगवान का शुक्र है, कोई नुकसान नहीं हुआ।
इसी तरह, कपकोट बाजार में दुकानदारों ने भी घरों की मजबूती जांच ली। स्कूलों और कार्यालयों में भी हलचल मच गई, लेकिन जल्द ही सब सामान्य हो गया। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों को भूकंप के दौरान ‘ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन’ का पालन करने की याद दिलाई। इसके अलावा, घरों में भारी सामान न रखने और इमारतों की नियमित जांच कराने की सलाह दी गई।उत्तराखंड सरकार ने भूकंप प्रभावित क्षेत्रों के लिए पहले से ही तैयारियां कर रखी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। राज्य में सैकड़ों सिस्मोग्राफ स्टेशन लगाए गए हैं, जो रीयल टाइम डेटा भेजते हैं। फिर भी, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि हिमालय में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है। आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर सीएसके सिंह ने कहा, “छोटे भूकंप बड़े खतरे की चेतावनी हैं। लोगों को तैयार रहना चाहिए।
ग्रामीण विकास विभाग ने कपकोट जैसे क्षेत्रों में पक्के घर बनाने पर जोर दिया है।इस घटना से एक बार फिर साबित हो गया कि उत्तराखंड में भूकंप पूर्वानुमान और तैयारी जरूरी है। कपकोट के निवासी अब भी सतर्क हैं, लेकिन जीवन पटरी पर लौट चुका है। एनएससी लगातार इलाके पर नजर रख रहा है। उम्मीद है कि आगे कोई बड़ा हादसा न हो। राज्य सरकार ने राहत टीमों को अलर्ट पर रखा है। भूकंप के बाद मौसम विभाग ने भी हल्की बारिश की चेतावनी जारी की, जिससे पहाड़ी रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने यात्रियों को सावधानी बरतने को कहा। कुल मिलाकर, यह हल्का भूकंप था, लेकिन सबक जरूर दिया।
