नई दिल्ली: नए साल 2026 की शुरुआत दिल्लीवासियों के लिए किसी भयावह सपने से कम नहीं रही। राष्ट्रीय राजधानी में रहस्यमय तरीके से लोग गायब हो रहे हैं, और दिल्ली पुलिस के ताजा आंकड़े सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। मात्र 15 दिनों में 807 लोग लापता बताए गए, जिनमें से करीब दो-तिहाई महिलाएं और लड़कियां हैं। यह आंकड़ा न केवल महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पूरे शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है। क्या दिल्ली अब अपराधियों का सुरक्षित आशियाना बन चुकी है? दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 19 जनवरी से 2 फरवरी 2026 तक की अवधि में कुल 807 लोग लापता हुए। इनमें 509 महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं, जबकि पुरुषों की संख्या महज 298 है। वयस्क श्रेणी में भी यही भयावह तस्वीर उभरती है—363 महिलाएं लापता, जबकि पुरुष 253।
नाबालिग लड़कियों की संख्या 146 बताई गई है, जो समाज के सबसे नाजुक तबके पर खतरे की घंटी बजा रही है। ये आंकड़े दिल्ली पुलिस की वेबसाइट और दैनिक रिपोर्ट्स से लिए गए हैं, जो स्पष्ट रूप से महिलाओं पर लक्षित अपराधों की ओर इशारा करते हैं।यह समस्या नई नहीं है, लेकिन 2026 की शुरुआत में इसकी तीव्रता चिंताजनक है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव तस्करी, अपहरण और यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं। दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में रहने वाली महिलाएं—चाहे वह नौकरीपेशा हों, छात्राएं हों या गृहिणियां—सबके लिए खतरा मंडरा रहा है। उदाहरण के तौर पर, हाल ही में दक्षिण दिल्ली के एक इलाके से एक 22 वर्षीय कॉलेज छात्रा का अपहरण हुआ, जिसकी बरामदगी के बाद खुलासा हुआ कि उसे अंतरराज्यीय गिरोह ने निशाना बनाया था।
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इसी तरह, पूर्वी दिल्ली में कई नाबालिग लड़कियां गायब हुईं, जिनमें से कुछ के मामले मानव तस्करी से जुड़े पाए गए।सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की भीड़भाड़ वाली गलियां, खराब स्ट्रीट लाइटिंग और सीमित पुलिस निगरानी इस समस्या को बढ़ावा दे रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के पिछले आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में प्रति लाख महिलाओं पर लापता होने के मामले देश में सबसे ज्यादा हैं। 2025 में ही यहां 5,000 से अधिक महिलाएं लापता हुईं, जिनमें से 70% का सुराग लगा भी नहीं। नए साल में यह संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो शहरीकरण के अंधेरे पहलू को उजागर करती है। सोशल मीडिया पर भी दिल्लीवासी अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं—#DelhiMissingGirls और #WomenSafetyNow जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।सरकार और पुलिस क्या कर रही है? दिल्ली पुलिस ने विशेष हेल्पलाइन (1091) को सक्रिय किया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई गिरोहों का पर्दाफाश किया है।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की है, जबकि बीजेपी ने इसे लॉ एंड ऑर्डर फेलियर करार दिया। एनजीओ जैसे मिशन सेव्ह चाइल्ड और गर्ल चाइल्ड प्रोटेक्शन सक्रिय हो गए हैं, जो जागरूकता अभियान चला रहे हैं। फिर भी, आंकड़े सुधार की मांग कर रहे हैं। पुलिस को सख्ती से पेट्रोलिंग बढ़ानी होगी, महिलाओं के लिए अलग से सेफ्टी ऐप विकसित करना होगा और सीमावर्ती इलाकों में चेकपोस्ट लगाने पड़ेंगे। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। अभिभावक, स्कूल और समाज को भी सतर्क रहना होगा—बच्चों को ट्रैकिंग डिवाइस दें, रात में अकेले न निकलें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें। दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने कहा, हम 24×7 मॉनिटरिंग कर रहे हैं, जल्द ही कई केस सॉल्व होंगे। लेकिन आंकड़े झूठ नहीं बोलते। अगर यही सिलसिला चला, तो दिल्ली की ‘सुरक्षा’ सिर्फ किताबी शब्द बनकर रह जाएगी।
