देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूरी अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। देहरादून में उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूरी जी के निधन ने राजनीति, समाज और आम जनता को गहरे दुख में डाल दिया है। मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल माने जाते थे। भारतीय सेना में लंबी सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अपने सख्त फैसलों तथा साफ-सुथरी छवि के कारण जनता के बीच खास पहचान बनाई। उत्तराखंड के लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया।
साल 2007 में पहली बार उन्हें उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सुधारों, सड़क निर्माण और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर तेजी से काम किया। उनका कार्यकाल विकास और सुशासन के लिए याद किया जाता है। उन्होंने सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने की कोशिश की और अधिकारियों को जवाबदेह बनाने पर विशेष जोर दिया। हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है, क्योंकि वे जिम्मेदारी लेने से कभी पीछे नहीं हटे। राजनीति में ऐसे उदाहरण कम देखने को मिलते हैं, जहां कोई नेता हार की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करे।
इसके बाद वर्ष 2011 में एक बार फिर पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया गया। दूसरे कार्यकाल में भी उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। उनके नेतृत्व में “खंडूरी है जरूरी” का नारा पूरे उत्तराखंड में बेहद लोकप्रिय हुआ। यह सिर्फ एक नारा नहीं था, बल्कि जनता के विश्वास की पहचान बन चुका था। लोगों को लगता था कि यदि खंडूरी नेतृत्व में हैं तो सरकार ईमानदारी और अनुशासन के साथ काम करेगी। उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खंडूरी जी का योगदान उत्तराखंड के विकास और सुशासन के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि खंडूरी जी अनुशासित, कर्मठ और दूरदर्शी नेता थे, जिनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी।
वहीं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने अपने पिता को भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का मार्ग दिखाया। उनके सिद्धांत और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। भुवन चंद्र खंडूरी का राजनीतिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में भी ईमानदारी और साफ छवि के साथ जनता का विश्वास जीता जा सकता है। उन्होंने उत्तराखंड को विकास की नई सोच दी और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। आज जब उत्तराखंड उन्हें अंतिम विदाई दे रहा है, तब हर आंख नम है। लोग उन्हें सिर्फ एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक सच्चे सैनिक, ईमानदार प्रशासक और जनता के नेता के रूप में याद कर रहे हैं। उनका जाना उत्तराखंड की राजनीति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। लेकिन उनके सिद्धांत, उनकी सादगी और उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।
