अल्मोड़ा(द्वाराहाट): उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद द्वाराहाट में आयोजित होने वाला प्रसिद्ध स्याल्दे बिखौती मेला 2026 एक बार फिर पूरे क्षेत्र में उत्साह और उमंग का माहौल लेकर आ रहा है। इस ऐतिहासिक मेले के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक द्वाराहाट क्षेत्र में पहुंचते हैं। बढ़ती भीड़ और यातायात दबाव को देखते हुए प्रशासन ने एक सुव्यवस्थित यातायात डायवर्जन प्लान लागू किया है, जिससे आवागमन सुचारू और सुरक्षित बना रहे।
यह डायवर्जन प्लान 14 अप्रैल 2026 सुबह 6:00 बजे से 16 अप्रैल 2026 रात 9:00 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान छोटे और बड़े वाहनों के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। अल्मोड़ा और रानीखेत से द्वाराहाट व चौखुटिया की ओर आने वाले छोटे वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा, ताकि मुख्य बाजार क्षेत्र में भीड़भाड़ को नियंत्रित किया जा सके। इसी प्रकार चौखुटिया से अल्मोड़ा या रानीखेत जाने वाले वाहनों के लिए भी विशेष मार्ग तय किए गए हैं।
मेला क्षेत्र के प्रमुख आकर्षण दुनागिरी मंदिर के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को भी अलग दिशा-निर्देश दिए गए हैं। मंदिर तक पहुंचने वाले वाहनों को निश्चित मार्गों से होकर ही गुजरना होगा, जिससे धार्मिक स्थल पर भीड़ प्रबंधन सुचारू रूप से किया जा सके।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेले की अवधि में बड़े वाहनों (ट्रक, कंटेनर आदि) के आवागमन पर सुबह 9:00 बजे से रात 9:00 बजे तक पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ऐसे वाहनों को निर्धारित स्थानों पर ही रोका जाएगा, जिससे मेले के दौरान जाम की स्थिति उत्पन्न न हो। इसके अलावा, मेला क्षेत्र को जीरो जोन घोषित किया गया है, जहां किसी भी प्रकार के छोटे या बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यह कदम मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

वाहनों की पार्किंग के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। स्थानीय व्यापारियों और निवासियों के वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़ा किया जाएगा, जिससे सड़कों पर अनावश्यक भीड़ न बढ़े। साथ ही, यात्रियों की सुविधा के लिए अस्थायी टैक्सी स्टैंड भी बनाए गए हैं, जहां से टैक्सियों का संचालन नियंत्रित तरीके से किया जाएगा। प्रशासन का यह डायवर्जन प्लान दर्शाता है कि मेले को व्यवस्थित, सुरक्षित और सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। यदि मेला अवधि बढ़ती है, तो यह योजना आगे भी लागू रहेगी। अंततः, स्याल्दे बिखौती मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की परंपरा और आस्था का प्रतीक है। ऐसे में सभी आगंतुकों से अपील है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और इस मेले का आनंद सुरक्षित एवं अनुशासित तरीके से लें।
