अल्मोड़ा: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक ऐसी खबर आ रही है, जो न सिर्फ स्थानीय लोगों की लंबे समय की मांग को पूरा करती है, बल्कि समाज सुधार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। शराब की दुकानों के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनभावनाओं ने आखिरकार प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया। जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए चार नई मदिरा दुकानों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह निर्णय जनदबाव के बाद लिया गया है, जो महिलाओं, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों के अथक संघर्ष का परिणाम है।जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, यह फैसला स्थानीय निवासियों की भावनाओं और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हम समाज के हित में हमेशा सजग रहते हैं।
पिछले कई दिनों से अल्मोड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। महिलाएं आगे-आगे नारे लगातीं, तो पुरुष और युवा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। इन आंदोलनों का मुद्दा सिर्फ दुकानों का विरोध नहीं था, बल्कि शराब के सेवन से परिवारों का बिखरना, घरेलू हिंसा, दुर्घटनाएं और युवाओं का भटकाव जैसी गंभीर समस्याएं थीं। ग्रामीणों का कहना था कि नई दुकानें खुलने से गांवों का माहौल खराब हो रहा है, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर बुरा असर पड़ रहा है। जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार, सोमेश्वर क्षेत्र के दौलाघट में स्थित विदेशी मदिरा दुकान, द्वाराहाट के तिपोला और खेड़ा की विदेशी शराब दुकानें, तथा रानीखेत के पातली क्षेत्र की देशी शराब दुकान को आगामी वित्तीय वर्ष से बंद कर दिया जाएगा। ये दुकानें हाल ही में आवंटित की गई थीं, जिसके खिलाफ स्थानीय स्तर पर जबरदस्त विरोध हुआ।
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सोमेश्वर और द्वाराहाट जैसे क्षेत्रों में तो महिलाओं ने सड़क जाम कर दिया था, जबकि रानीखेत में सामाजिक संगठनों ने धरना दिया। इन प्रदर्शनों में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाया।यह फैसला अल्मोड़ा जिले के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में शराब की समस्या पुरानी है। यहां की संकरी सड़कें, दुर्गम इलाके और युवाओं की बेरोजगारी शराब के सेवन को और घातक बना देती है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में शराब से जुड़ी दुर्घटनाएं और पारिवारिक कलह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अल्मोड़ा के इस निर्णय से न सिर्फ इन चार दुकानों का अंत होगा, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बनेगा। जिलाधिकारी अंशुल सिंह की तारीफ हो रही है, जिन्होंने जनभावनाओं को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है। सोमेश्वर की एक महिला कार्यकर्ता ने कहा, “हमारा संघर्ष रंग लाया। अब हमारे बच्चे सुरक्षित रहेंगे।” द्वाराहाट के ग्रामीणों ने प्रशासन का धन्यवाद दिया और आगे भी सामाजिक मुद्दों पर एकजुट रहने का संकल्प लिया। यह घटना साबित करती है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी ताकत है। अगर हर जिले में ऐसी जागरूकता हो, तो उत्तराखंड शराब मुक्त राज्य की ओर बढ़ सकता है।अल्मोड़ा प्रशासन का यह कदम न सिर्फ स्थानीय समस्याओं का समाधान है, बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। आंदोलनकारी संगठनों ने इसे अपनी जीत बताते हुए बधाई दी है। उम्मीद है कि यह सिलसिला यहीं न रुके और अन्य क्षेत्रों में भी शराब की दुकानों पर अंकुश लगे। अल्मोड़ा ने दिखा दिया कि एकजुट होकर कुछ भी हासिल किया जा सकता है!
