देहरादून: उत्तराखंड से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर देहरादून जिले से सामने आ रही है। राज्य सरकार ने महावीर जयंती को लेकर घोषित सार्वजनिक अवकाश में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। पहले जहां यह अवकाश 31 मार्च 2026 को निर्धारित था, वहीं अब इसे एक दिन पहले यानी 30 मार्च (सोमवार) को मनाया जाएगा। यह निर्णय राज्य के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में लागू होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह परिवर्तन महावीर जयंती के वास्तविक पर्व की तिथि को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि जैन श्रद्धालु उसी दिन धार्मिक आयोजनों और परंपराओं में सहजता से शामिल हो सकें।यह संशोधन न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है, बल्कि प्रशासनिक सुगमता को भी सुनिश्चित करता है।
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दरअसल, 31 मार्च को वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति है। इस दिन कार्यालय बंद रहने से विभागों को वित्तीय बंदोबस्त, बिल भुगतान और लेखा-जोखा तैयार करने में कठिनाई हो सकती थी। सरकार ने इसी चुनौती को भांपते हुए 30 मार्च को अवकाश घोषित कर दिया, जिससे 31 मार्च को सभी कार्यालय सुचारू रूप से संचालित रह सकें। इससे किसी विभाग को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह कदम उत्तराखंड सरकार की कुशलता और संतुलित नीति को दर्शाता है, जहां धार्मिक महत्व और प्रशासनिक जरूरतों का बखूबी ध्यान रखा गया है।महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर राज्यभर में जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, शोभायात्राएं और धार्मिक सभाएं आयोजित होती हैं।
देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और नैनीताल जैसे शहरों में श्रद्धालु भगवान महावीर के जीवन संदेशों—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह—पर आधारित कार्यक्रमों में भाग लेंगे। 30 मार्च को अवकाश मिलने से सरकारी कर्मचारी और छात्र भी इन आयोजनों में सक्रिय रूप से शामिल हो पाएंगे। जैन समुदाय ने इस निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि इससे पर्व की प्रामाणिकता बनी रहेगी।वहीं, वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर फोकस करना भी सराहनीय है। हर साल 31 मार्च को विभागों पर दबाव रहता है। बकाया भुगतान, ऑडिट रिपोर्ट और बजट समापन जैसे कार्यों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण होता है।
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहां मौसमी चुनौतियां भी आती हैं, इस तरह का संशोधन विकास कार्यों को गति प्रदान करेगा। शिक्षा विभाग में भी यह फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि स्कूल-कॉलेज बंद न होने से परीक्षाओं और अन्य गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा।यह निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की दूरदर्शिता को उजागर करता है। राज्य सरकार ने पहले भी त्योहारों और प्रशासनिक जरूरतों को संतुलित करने के उदाहरण दिए हैं। आने वाले दिनों में अन्य छुट्टियों पर भी ऐसी समीक्षा की उम्मीद है। नागरिकों से अपील है कि वे आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि करें और 30 मार्च को धार्मिक उत्सव मनाएं, जबकि 31 मार्च को कार्यालयी दायित्व निभाएं। यह बदलाव निश्चित रूप से राज्य के हित में है।
