गैरसैंण: उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में जोर-शोर से चल रहा है। आज मंगलवार को इसका दूसरा दिन है, जहां सदन में प्रश्नकाल का आयोजन होगा। पांच दिवसीय इस सत्र के दूसरे दिन पक्ष और विपक्ष के विधायकों के सवालों से सरकार को किनारा कशना पड़ेगा। इसके अलावा सदन पटल पर कई महत्वपूर्ण रिपोर्टें और चार अध्यादेश रखे जाएंगे, जिनमें समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा संशोधन अध्यादेश भी शामिल है। सोमवार को सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जो मौजूदा वर्ष की तुलना में 10.41 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने इसे राज्य के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाला बताया है।
प्रश्नकाल में 600 से अधिक सवाल, विभिन्न विभागों पर चर्चा
इस बार विधायकों ने विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर कुल 600 से अधिक प्रश्न लगाए हैं। प्रश्नकाल के दौरान ये सवाल उठेंगे, जिन पर सरकार को जवाब देना होगा। विपक्षी दल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर विकास कार्यों, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर तीखे सवाल करने की पूरी संभावना है। गैरसैंण में आयोजित सत्र होने से पहाड़ी क्षेत्रों के विकास पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। विधायक ग्रामीण इलाकों की समस्याओं, जैसे जल संकट, बेरोजगारी और आपदा प्रबंधन पर सवाल उठा सकते हैं। सदन पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट रखी जाएगी, जो राज्य की आर्थिक स्थिति का आईना पेश करेगी। इसके साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सात महत्वपूर्ण रिपोर्टें भी प्रस्तुत होंगी। ये रिपोर्टें सरकारी खर्चों, योजनाओं के कार्यान्वयन और वित्तीय अनियमितताओं पर रोशनी डालेंगी। विपक्ष इन रिपोर्टों को हथियार बनाकर सरकार को घेर सकता है।
UCC संशोधन अध्यादेश पर बहस की उम्मीद
चार अध्यादेशों में सबसे ज्यादा चर्चा समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़े संशोधन अध्यादेश पर होगी। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां UCC को कानूनी रूप दिया गया है। यह अध्यादेश विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर एकसमान कानून लागू करने के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार का दावा है कि इससे सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा, लेकिन विपक्ष धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर सवाल उठा सकता है। अन्य अध्यादेश राज्य के विकास से जुड़े हो सकते हैं, जैसे भूमि सुधार या पर्यावरण संरक्षण।
बजट पर प्रतिक्रियाएं और अपेक्षाएं
सोमवार को पेश बजट को सरकार ने ‘विकासोन्मुख’ करार दिया है। इसमें सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन पर विशेष प्रावधान हैं। 1,11,703.21 करोड़ का यह बजट पिछले वर्ष के 1,01,175 करोड़ से 10.41 प्रतिशत अधिक है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह बजट राज्य को आत्मनिर्भर बनाने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसमें चारधाम यात्रा मार्ग, रोपवे परियोजनाएं और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारी आवंटन किया गया है। हालांकि, विपक्ष ने इसे ‘कागजी शेर’ बताते हुए जमीन पर कार्यान्वयन की मांग की है।
सत्र का महत्व और भविष्य की दिशा
यह बजट सत्र उत्तराखंड की राजनीति के लिए अहम है। प्रश्नकाल में उठने वाले सवाल राज्य सरकार की नीतियों की कसौटी पर कसेंगे। कैग रिपोर्टें पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर सकती हैं। UCC अध्यादेश राज्य को राष्ट्रीय चर्चा में ला सकता है। सत्र के दौरान विधायकों के बीच बहस तेज होने की संभावना है, जो लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाएगी। गैरसैंण सत्र पहाड़ी विकास को प्राथमिकता देता है, जो राज्य की पहचान है।कुल मिलाकर, आज का दिन सदन में गतिविधियों से भरा रहेगा। विधायकों के सवालों से सरकार की परीक्षा होगी, जबकि रिपोर्टें और अध्यादेश नीतिगत दिशा तय करेंगे। यह सत्र उत्तराखंड के विकास पथ पर नई दिशा दे सकता है।
