देहरादून: उत्तराखंड में अपराधियों और अवैध कारोबारियों के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें सबसे प्रमुख ‘उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी गई। यह विधेयक ब्रिटिश काल के 1867 के पुराने कानून को पूरी तरह निरस्त कर देगा। नए कानून से जुआ खेलना या सट्टेबाजी का सिंडिकेट चलाना सीधे जेल की राह दिखाएगा। साथ ही, कैबिनेट ने पूर्व सैनिकों के आरक्षण, अल्पसंख्यक आयोग, निजी विश्वविद्यालयों और नेपाली अकादमी जैसे क्षेत्रों में भी ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। इन फैसलों से राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ शिक्षा और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा मिलेगा।
जुआ-सट्टेबाजी पर अब जीरो टॉलरेंस
नया विधेयक जुआ और सट्टे के खिलाफ राज्य की लड़ाई को नई ताकत देगा। इसमें सजा की अवधि बढ़ाई गई है और पहली बार के अपराधी को भी कड़ी सजा का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति दूसरी बार या बार-बार जुआ खेलते या सट्टा लगाते पकड़ा जाता है, तो उसे दोगुनी सजा और दोगुना जुर्माना भरना पड़ेगा। खास बात यह है कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी को भी दायरे में लाया गया है, जो डिजिटल युग में बढ़ते इस खतरे को रोकने का प्रयास है। पुलिस को अब पहले से अधिक अधिकार मिलेंगे। सब-इंस्पेक्टर (SI) या उससे ऊपर के अधिकारी सार्वजनिक स्थानों पर जुआरियों को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकेंगे। इसके अलावा, जुए या सट्टेबाजी से बनी अवैध संपत्ति को कुर्क और जब्त किया जा सकेगा। संदिग्ध ठिकानों पर तलाशी और जब्ती बिना देरी के संभव होगी। इससे सट्टा माफिया और जुआ सिंडिकेट्स पर लगाम लगेगी, जो राज्य में सामाजिक बुराइयों का बड़ा कारण बने हुए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह कदम राज्य को अपराधमुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
नए कानून में बदले सजा और जुर्माने का पूरा गणित
अपराध की श्रेणी सजा का प्रावधान जुर्माने की राशि
- सार्वजनिक स्थान पर जुआ 3 माह की जेल 5,000 रुपये
- जुआ घर (गैंबलिंग हाउस) चलाना 5 साल तक जेल 1 लाख रुपये तक
- सट्टेबाजी का सिंडिकेट चलाना 3 से 5 साल की जेल 2 से 10 लाख रुपये
- ऑनलाइन जुआ/सट्टेबाजी नए एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई अपराध के अनुसार
ये भी हुए निर्णय
- तीन निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने को निजी विश्वविद्यालय विधेयक में संशोधन को स्वीकृति
- पूर्व सैनिकों को केवल एक ही बार मिलेगा आरक्षण का लाभ, विधेयक के मसौदे में संशोधन को स्वीकृति
- भाषा संस्थान के दायरे में लाई गई नेपाली अकादमी
- उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग में तय होगा सदस्यों का कार्यकाल, विधेयक में होगा संशोधन
