द्वाराहाट, अल्मोड़ा। जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं! जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार को द्वाराहाट के मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण कर कई चौंकाने वाली अनियमितताओं का पर्दाफाश किया। एक स्टोर में रेफ्रिजरेटर बंद पाया गया, जहां संवेदनशील दवाओं का रखरखाव होना चाहिए था। इसके अलावा एक्सपायरी दवाओं का अनुचित संग्रह, कैश मेमो की कमी और सीसीटीवी फुटेज न दिखाने जैसी खामियां सामने आईं। टीम ने सात स्टोरों से सात दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि एक स्टोर के लाइसेंस को निलंबित करने की सिफारिश कर दी गई। यह कार्रवाई आमजन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक सख्त संदेश है।निरीक्षण का नेतृत्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शची शर्मा, ड्रग इंस्पेक्टर पूजा जोशी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र द्वाराहाट के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कमलेश पांडे ने किया।
टीम ने विभिन्न मेडिकल स्टोरों का दौरा कर एक्सपायरी दवाओं की जांच की, लाइसेंस की वैधता परखी और संचालन के मानकों का जायजा लिया। परिणाम निराशाजनक रहे। कई स्टोरों में एक्सपायरी बॉक्स नियमानुसार नहीं बनाए गए थे, जहां पुरानी दवाओं को अलग रखना अनिवार्य है। कैश मेमो का रखरखाव न होने से ग्राहकों को बिल उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे, जो उपभोक्ता अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। कुछ जगहों पर दवाओं का रखरखाव इतना लापरवाह था कि नमी और धूल से वे खराब हो रही थीं। एक स्टोर में तो रेफ्रिजरेटर पूरी तरह बंद था, जो इंजेक्शन और वैक्सीन जैसी दवाओं के लिए घातक साबित हो सकता है। टीम ने सीसीटीवी रिकॉर्डिंग मांगी, लेकिन कई स्टोर संचालकों ने बहाने बनाए। ये अनियमितताएं केवल तकनीकी खामियां नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं। एक्सपायरी दवाएं लेने से मरीजों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जैसे लीवर फेलियर या एलर्जी।
यह भी पढ़ें:हल्द्वानी: नाबालिग को शराब पिलाकर किया गैंगरेप, मासूम की चीखें दफनाती कार!
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्र में, जहां मेडिकल सुविधाएं सीमित हैं, ऐसी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। द्वाराहाट बाजार में दर्जनों मेडिकल स्टोर हैं, जो स्थानीय लोगों की प्राथमिक जरूरत पूरी करते हैं। लेकिन निरीक्षण से साफ है कि लाभ के लालच में नियमों की अनदेखी हो रही है। टीम ने स्टोर संचालकों को साफ निर्देश दिए: कैश मेमो अनिवार्य रूप से दें, लेबल्ड एक्सपायरी बॉक्स बनाएं, सभी ग्राहकों को बिल प्रदान करें, एक्सपायरी दवाओं का सही निपटान करें, रेफ्रिजरेटर हमेशा चालू रखें और साफ-सफाई बनाए रखें। उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।यह निरीक्षण ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और उसके नियमों के तहत किया गया, जो मेडिकल स्टोरों पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करता है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे छापे नियमित होंगे।
सात स्टोरों को नोटिस जारी हो चुके हैं, और उनका जवाब न आने पर लाइसेंस रद्दीकरण की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा, “हम गरीब लोग डॉक्टर के पास कम जाते हैं, लेकिन दुकानों पर भरोसा करते हैं। अब सतर्क रहेंगे।” दूसरी ओर, स्टोर संचालक संगठन ने सफाई दी कि अधिकांश दुकानें नियमों का पालन करती हैं, लेकिन कुछ के कारण सबकी छवि खराब हो रही है।उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ऐसी कार्रवाइयां जरूरी हैं। अल्मोड़ा जिले में पहले भी फर्जी दवाओं के मामले सामने आ चुके हैं, जिनसे सैकड़ों मरीज प्रभावित हुए। केंद्र सरकार की ‘ड्रग रेगुलेशन’ नीति के तहत राज्यों को सक्रिय रहने के निर्देश हैं। यहां द्वाराहाट का यह मामला अन्य क्षेत्रों के लिए चेतावनी है। प्रशासन ने अपील की है कि उपभोक्ता भी सजग रहें—बिल लें, एक्सपायरी चेक करें और संदिग्ध स्टोर की शिकायत करें
