देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में एक बार फिर मौसम ने करवट लेने के संकेत दे दिए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून की ओर से जारी ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले हल्की बारिश और बर्फबारी की चपेट में आ सकते हैं। विशेष रूप से प्रदेश के तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की अधिक संभावना जताई गई है। हालांकि, अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहने की उम्मीद है। यह बदलाव न केवल पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, बल्कि कृषि, जल प्रबंधन और पर्यावरण पर भी असर डालेगा।सोमवार को मौसम का आगमन कुछ इस तरह हुआ कि दिन भर बादलों ने सूर्य को छिपाए रखा। कभी-कभी बादलों के बीच सूर्य की किरणें झांकती रहीं, जिससे ‘आंख मिचौली’ का नजारा देखने को मिला। लेकिन तापमान में कोई खास गिरावट नहीं आई।
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देहरादून में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री ऊपर 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान भी सामान्य के आसपास ही रहा। यह स्थिति पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दी के अंतिम दौर की याद दिलाती है, जहां मौसम कभी गर्मी तो कभी ठंड का खेल खेलता रहता है।मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एके शर्मा ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से यह बदलाव हो रहा है। अगले 48 घंटों में उक्त जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब मार्गों पर बर्फबारी संभव है। पिथौरागढ़ के मुनस्यारी और बागेश्वर के कांडा जैसे इलाकों में भी हिमपात की चेतावनी दी गई है। इससे सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, जिसके चलते यातायात बाधित होने का खतरा है।
एनएचआईडीसीएल और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है।यह मौसम परिवर्तन उत्तराखंड की जलवायु की अनिश्चितता को दर्शाता है। हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों का पिघलना और बर्फबारी का चक्र पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है। लेकिन लगातार बदलते मौसम से भूस्खलन और बाढ़ का जोखिम बढ़ जाता है। पिछले साल केदारनाथ यात्रा के दौरान इसी तरह की बर्फबारी ने यात्रियों को परेशान किया था। स्थानीय किसान भी चिंतित हैं, क्योंकि फलदार बागानों में फूल आने का समय है। हल्की बर्फबारी से सेब, खुबानी और आलू की फसल को नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान फसलों को ढकाव दें और सिंचाई पर नजर रखें।
पर्यटकों के लिए यह मौसम रोमांचक तो है, लेकिन सतर्कता जरूरी। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले ही बर्फबारी से रास्ते बंद हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें दिखाती हैं कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले ही हल्का हिमपात हो चुका है। ग्रामीण इलाकों में लोग पारंपरिक तरीके से तैयारी कर रहे हैं – घरों में अलाव जलाना, ऊनी कपड़े निकालना। मौसम विभाग ने लाल और पीले अलर्ट जारी किए हैं, इसलिए लोग घर से बाहर निकलते समय सावधानी बरतें।
