भौगोलिक संकेतक (GI) Tag की वैश्विक शुरुआत
भौगोलिक संकेतक (GI) की अवधारणा का जन्म यूरोप में हुआ था, जहां विशेष रूप से वाइन और शराब उत्पादों की विशिष्टता को पहचानने की आवश्यकता महसूस की गई थी। इसकी औपचारिक मान्यता और कानूनी सुरक्षा की प्रक्रिया आगे चलकर विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अंतरराष्ट्रीय संधियों के माध्यम से स्थापित हुई।
1. शुरुआती दौर (19वीं-20वीं सदी)
- फ्रांस में AOC प्रणाली (Appellation d’Origine Controlee) (1935):
- फ्रांस ने AOC (नामित मूल नियंत्रण) प्रणाली की शुरुआत की, जिससे विशेष वाइन और अन्य उत्पादों की गुणवत्ता और क्षेत्रीय पहचान को सुरक्षित किया गया।
2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर GI की स्वीकृति
- लिस्बन समझौता (1958):
- विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के तहत लिस्बन समझौते ने भौगोलिक संकेतों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय रूप दिया।
- मैड्रिड समझौता (1891) और पेरिस कन्वेंशन (1883):
- ये संधियां भी नाम और ब्रांड सुरक्षा में महत्वपूर्ण रहीं, जिससे GI की अवधारणा को बल मिला।
3. WTO और TRIPS समझौता (1995)
- ट्रिप्स समझौता (Trade-Related Aspects of Intellectual Property Rights – TRIPS, 1995):
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देशों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया कि वे GI उत्पादों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करें।
- ट्रिप्स समझौते के तहत, कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प, खाद्य पदार्थों और औद्योगिक उत्पादों पर GI लागू किया गया।
4. भारत में GI टैग की शुरुआत (1999-2003)
- GI अधिनियम (1999):
- भारत ने भौगोलिक संकेत माल (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 पारित किया।
- यह कानून WTO के TRIPS समझौते के अनुरूप बनाया गया।
- भारत का पहला GI टैग (2003):
- दार्जिलिंग चाय पहला भारतीय उत्पाद था जिसे 2003 में GI टैग मिला।
5. वर्तमान स्थिति (2024-2025)
- अब 150 से अधिक देशों में GI टैग को मान्यता प्राप्त है।
- यूरोप में फ्रांस, इटली, स्पेन, जर्मनी, और पुर्तगाल जैसे देश सबसे अधिक GI टैग वाले उत्पाद रखते हैं।
- भारत में अब तक 605 से अधिक उत्पादों को GI टैग मिल चुका है।
प्रसिद्ध GI टैग वाले उत्पाद (विश्व स्तर पर)
- फ्रांस: शैम्पेन (Champagne), रॉकफोर्ट चीज़
- इटली: पार्मेज़ान चीज़, मोडेना बाल्समिक विनेगर
- स्पेन: रोनीब्लांको, स्पेनिश जैतून का तेल
- भारत: दार्जिलिंग चाय, बनारसी साड़ी, अल्फांसो आम
GI टैग वैश्विक स्तर पर उत्पादों की गुणवत्ता, विशिष्टता और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। WTO और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका इसे मजबूत करने में सहायक रही है।
भारत में GI टैग की स्थिति:
- वर्तमान स्थिति: भारत में अब तक 605 उत्पादों को GI टैग प्रदान किया जा चुका है।
- भविष्य का लक्ष्य: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 22 जनवरी 2025 को आयोजित GI समागम में घोषणा की कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक 10,000 उत्पादों को GI टैग प्रदान करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा।
GI टैग के लाभ:
- कानूनी सुरक्षा: यह टैग उत्पाद को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे उसकी नकल या अनधिकृत उपयोग को रोका जा सकता है।
- आर्थिक समृद्धि: यह उत्पादकों को उनकी विशिष्टता के लिए उचित मूल्य दिलाने में सहायता करता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
- निर्यात में वृद्धि: GI टैग वाले उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बढ़ती है, जिससे निर्यात को प्रोत्साहन मिलता है।
कानूनी ढांचा:
भारत में GI टैग से संबंधित कानूनी प्रावधान “भौगोलिक संकेत माल (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999” के तहत आते हैं। इस अधिनियम का प्रशासन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा किया जाता है। GI रजिस्ट्री चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है।
GI टैग की वैधता:
GI टैग का पंजीकरण 10 वर्षों के लिए वैध होता है, जिसे समय-समय पर नवीनीकृत किया जा सकता है।
उदाहरण: दार्जिलिंग चाय भारत का पहला उत्पाद था जिसे 2003 में GI टैग प्रदान किया गया था।
कुल मिलाकर, GI टैग भारतीय उत्पादों की विशिष्टता और गुणवत्ता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे उत्पादकों को लाभ होता है और उपभोक्ताओं को प्रमाणित उत्पाद मिलते हैं।
भारत के अन्य राज्यों की भांति उत्तराखंड के कई उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है, जो उनकी विशिष्टता और गुणवत्ता को मान्यता देता है। दिसंबर 2023 में, उत्तराखंड एक दिन में सबसे अधिक 18 GI टैग प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बना।
हाल ही में GI टैग प्राप्त 18 उत्पाद:
- चौलाई
- झंगोरा
- मंडुआ
- लाल चावल
- अल्मोड़ा लखोरी मिर्च
- बेरीनाग चाय
- बुरांस शरबत
- रामनगर नैनीताल लीची
- रामगढ़ आड़ू
- माल्टा
- पहाड़ी तुअर
- गहत
- काला भट्ट
- बिच्छूबूटी फैब्रिक
- नैनीताल मोमबत्ती
- कुमाऊँनी रंगवाली पिछोड़ा
- चमोली रम्माण मास्क
- लिखाई वुड कार्विंग
इनके अलावा, पहले से GI टैग प्राप्त 9 उत्पाद हैं:
- तेजपात
- बासमती चावल
- ऐपण आर्ट
- मुनस्यारी का सफेद राजमा
- रिंगाल क्राफ्ट
- थुलमा
- भोटिया दन
- च्यूरा ऑयल
- ताम्र उत्पाद
कुल मिलाकर, उत्तराखंड के 27 उत्पादों को GI टैग मिल चुका है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को दर्शाता है।
भौगोलिक संकेतक (Geographical Indications या GI) टैग किसी उत्पाद को दिया जाने वाला एक विशेष पहचान चिह्न है, जो उस उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति, गुणवत्ता या विशेषता को दर्शाता है। यह टैग उत्पाद को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और उसकी विशिष्टता को मान्यता देता है।