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Wednesday, July 17, 2024

लोकसभा चुनाव 2024 : मतदाता की उंगली पर लगने वाली स्याही का उपयोग कब ? क्यूँ और कैसे ? जानें पूरा इतिहास

लोकसभा चुनाव 2024 :

देश में चुनावी त्यौहार शुरू होने जा रहा है, कई हिस्सों में मतदाता 19 अप्रैल को अपना मत डालेंगे । वोट करने के दौरान एक सवाल जो अकसर मतदाता के मन में उठता है वह है कि –

1- वोट करने के बाद उसकी उंगली में यह स्याही क्यूँ लगाई जाती है ?
2- कब से इस स्याही को लगाने का नियम बना है ?
3- इस स्याही को कहा क्या जाता है ?
4- यह स्याही कहाँ बनती है ?
5- हमारे देश के अलावा यह स्याही किन – किन देशों में मतदान के समय प्रयोग की जाती है ?

आईए इन सब सवालों के जवाब जानते हैं –

उंगली पर लगी यह स्याही इस बात का प्रतीक है कि किसी व्यक्ति ने अपना वोट किया है या नहीं । इस नीले रंग की स्याही को भारतीय चुनाव में शामिल करने का श्रेय देश के पहले चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन को जाता है । साल 1962 से इस स्याही का प्रयोग किया जा रहा है और अभी तक चुनाव आयोग इसका दूसरा विकल्प नहीं ढूंढ पाया है । इससे देखा जा सकता है कि यह स्याही कई दशकों से अपना कार्य बखूबी से निभा रही है ।

इस स्याही को कहा क्या जाता है ?

इसे लोग इलेक्शन इंक या इन्डेलिबल इंक के नाम से जानते हैं ।

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फोटो : इन्डेलिबल इंक या इलेक्शन इंक

 

यह स्याही कहाँ बनती है ?

यह स्याही दक्षिण भारत में स्थित एक कंपनी में बनाई जाती है । मैसूर पेंट एण्ड वार्निश लिमिटेड (MPVL) नाम की कंपनी इस स्याही को बनाती है । इस कंपनी की स्थापना साल 1937 में हुई थी । उस समय मैसूर के प्रांत के महाराज नलवाडी कृष्णराजा वादयार ने इसकी शुरुआत की थी । कंपनी इस स्याही को थोक मे नहीं बेचती है । एम.पी.वी.एल. के जरिए सरकार या चुनाव आयोग से जुड़ी एजेन्सीयों को ही इस स्याही की सप्लाई की जाती है। यह कंपनी और भी पेंट बनाती है लेकिन इसकी खास पहचान इस स्याही के लिए ही है ।

यह भी पढ़ें : लोकसभा चुनाव 2024: 19 अप्रैल को करे मतदान और पाइए 20 अप्रैल को होटल और रेस्टोरेंट में 20% छूट।

यह चुनावी स्याही क्यूँ नहीं मिटती ?

इस स्याही को बनाने के लिए सिल्वर नाइट्रेट केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जिसे कम – से – कम 72 घंटे तक त्वचा से मिटाया नहीं जा सकता । सिल्वर नाइट्रेट केमिकल को इसलिए इस्तेमाल किया जाता है क्यों कि यह पानी के साथ संपर्क में आने पर काले रंग का हो जाता है और मिटता नहीं है ।
जब चुनाव अधिकारी वोटर की उंगली में पर यह स्याही लगाता है तो सिल्वर नाइट्रेट हमारे शरीर में मौजूद नमक के साथ मिलकर सिल्वर क्लोराइड बनाता है । सिल्वर क्लोराइड पानी में घुलता नहीं है और त्वचा से जुड़ा रहता है । यह तभी मिटता है जब धीरे – धीरे त्वचा के सेल्स पुराने होने लगते हैं और वे उतरने लगते हैं ।
एम.पी.वी.अल (MPVL) की वेबसाईट बताती है कि उच्च क्वालिटी की चुनावी स्याही 40 सेकेंड से भी कम समय में सूख जाती है । इसका रिएक्शन इतनी तेजी से होता है कि उंगली पर लगते ही अपना निशान छोड़ देती है ।

भारत के अलावा किन देशों में होता है चुनावी स्याही का उपयोग :-

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चित्र : बाहरी देशों में चुनावी स्याही का उपयोग social media

अफगानिस्तान , अल्बानिया , बहामा , अल्जीरिया , मिश्र , ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया , इराक , पाकिस्तान , लेबनान , लीबिया , मलेशिया , मालदीव , म्यांमार , नेपाल , निकारागुआ, पेरू , फिलीपींस , सेंट किट्स और नेविस , दक्षिण अफ्रीका , श्रीलंका , सूडान, सीरिया , ट्यूनिशिया , तुर्की , वेनेजुएला ।

इसे भी पढ़ें :लोकसभा चुनाव 2024: स्वास्थ्य विभाग ने कसी कमर, डोली में बैठ कर वोट डालने जाएंगी गर्भवती महिलाएं।

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Mamta Negi
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