क्या कहा आज जन्मदिन है मेरा जौन तो यार मर गया कब का जीवनी: जॉन एलिया का सफर उर्दू के एक महान शायर जॉन एलिया, जिनका जन्म 14 दिसंबर 1931 को अरोहा उत्तरप्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम अल्लामा शफ़ीक़ हसन एलियाह था जो एक शायर और कवि तो थे ही उसके आलावा उनका कला और साहित्य से भी गहरा जुड़ाव था। बचपन से साहित्यिक माहौल में पलना जॉन एलिया के लिए ये एक उपहार से कम नहीं था इसी माहौल की बदौलत उन्होंने अपनी पहली उर्दू कविता 8 वर्ष की उम्र मे लिखी। नौजवानी में उनका झुकाव…
Author: Hemant Upadhyay
34 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अतुल सुभाष (Atul Subhash) की आत्महत्या ने भारतीय न्याय व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दहेज प्रताड़ना और झूठे आरोपों के तहत कानूनी लड़ाई से टूट चुके अतुल ने 9 दिसंबर 2024 को अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उनके सुसाइड नोट और वीडियो में उन्होंने सिस्टम की खामियों और अपने ऊपर हुए अन्याय का जिक्र किया, जिसमें झूठे मुकदमों, कोर्ट के चक्कर और मानसिक उत्पीड़न ने उन्हें मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया। उनकी यह घटना न केवल व्यक्तिगत पीड़ा को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है…
हरिवंश राय बच्चन: हिंदी साहित्य के एक अनमोल सितारे हिन्दी साहित्य मे शब्द रूपी हाला को काव्य रूपी प्याले मे डालकर साहित्य के रसिकों को काव्य रस चखाने वाले हिंदी के महानतम कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने अपनी कविताओं से जो नशा उस समय अपने पाठकों के ऊपर बिखेरा था वो आज भी साहित्य मे रूचि रखने वाले हर पाठक के ऊपर चढ़ा है। आज हम उसी साहित्य के नशे को बरकरार रखते हुए हिंदी काव्य में “हालावाद” के प्रवर्तक हरिवंश राय बच्चन जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन करते हैं। आज हम उनकी कुछ प्रमुख कविताओं…
पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की संक्षिप्त जीवनी- पंडित जवाहरलाल नेहरू (चाचा नेहरू) जी का जन्म 14 नवम्बर 1889 प्रयागराज मे हुआ था। जो मूलतः एक कश्मीरी पंडित समुदाय से थे, इन्हें पंडित नेहरू के नाम से भी जाना जाता था।उनके पिता, मोतीलाल नेहरू एक धनी बैरिस्टर थे और इनकी माता जी का नाम स्वरूपरानी थुस्सू था जो मोतीलाल नेहरू की दूसरी पत्नी थी।जवाहरलाल नेहरू जी की दो छोटी बहन थी वह अपने घर में सबसे बड़े थे।उनकी बहन विजया लक्ष्मी संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी। जवाहरलाल नेहरू ने 1912 में विदेश से भारत लौटकर अपनी वकालत शुरू…
उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं. इस बार उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के सभी कार्यक्रम अल्मोड़ा जनपद के मार्चुला में हुई बस दुर्घटना के शोक से बड़ी सादगी शांतिपूर्ण ढंग से मनाए जाएंगे। उत्तराखंड जिसे देवभूमि कहा जाता है इस राज्य की स्थापना 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल नाम से हुई थी। उत्तरांचल को उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी हिस्से और पर्वतीय क्षेत्रों को मिलाकर बनाया गया था।यह उत्तर प्रदेश से अलग होकर भारत का 27वां राज्य बना। 2007 में औपचारिक रूप से उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। उत्तराखंड (Uttrakhand) एक नजर उत्तराखंड…
छायावाद के शिव कहे जाने वाले महामानव महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्तित्व के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपनी कविता के माध्यम से खुद के लिए कहा था- धिक् जीवन को जो पाता ही आया विरोध, धिक् साधन, जिसके लिए सदा ही किया शोध! सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का संक्षिप्त जीवन परिचय- आधुनिक हिंदी कविता में छायावाद के प्रमुख चार स्तंभों में से एक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का जन्म 21 फरवरी 1899 में पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में हुआ था। उनके बचपन का नाम सुर्जकुमार था। उनके पिता का…
लाल बहादुर शास्त्री: सादगी और महानता का अद्वितीय उदाहरण भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। पंडित लाल बहादुर शास्त्री जी जिनका जीवन सादगी से भरा हुआ था। शास्त्री जी वह व्यक्ति थे जिनके सर्वोत्कृष्ट कार्यकाल के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। वह उत्तम नेतृत्व वाले व्यक्ति थे। शास्त्री जी एक साधारण परिवार में जन्मे और प्रधानमंत्री जैसे पद पर आसीन होकर भी वह सामान्य ही बने रहे। संक्षिप्त जीवनी लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से कुछ दूर मुगलसराय नामक स्थान…
जिस कवि की कृति को अंग्रेजी सरकार ने जप्त कर लिया था। हम बात कर रहे हैं राष्ट्रकवि मैथली शरण गुप्त जी की। मैथिली शरण गुप्त जी की महत्वपूर्ण काव्य रचना भारत भारती जो 1912 में लिखी गई थी, यह गुप्त जी के यश का आधार है। मैथिलीशरण गुप्त जी की संक्षिप्त जीवनी मैथिलीशरण गुप्त जी का जन्म 3 अगस्त 1886 को चिरगांव, झांसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इनके पिताजी का नाम सेठ रामचरण कनकने और माता का नाम काशी बाई था। मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युगीन एक महत्वपूर्ण कवि थे। यह द्विवेदी युग के प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी…
आज हम एक ऐसे कवि के बारे जानेंगे जो मात्र 28 साल की उम्र मे इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। जिन्होंने हिंदी साहित्य मे “छायावाद” से लेकर “प्रयोगवाद” तक काव्य सृजन कर हिंदी साहित्य मे बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया। ‘प्रकृति का चितेरा कवि’ ‘मातृभाषा का महान कवि’ और ‘हिमवंत का एक कवि’ आदि नाम से जिन्हें जाना जाता है हम बात कर रहे हैं चंद्रकुँवर बर्त्वाल की। चंद्रकुँवर बर्त्वाल की संक्षिप्त जीवनी उत्तराखंड के एक महान कवि जिन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं,वह हैं चंद्रकुँवर बर्त्वाल। चंद्रकुँवर बर्त्वाल का जन्म उत्तराखंड मे गढ़वाल मण्डल के चमोली…
“मैं कुंजी कहता हिंदी को खुलता जिससे सामूहिक मन, क्षेत्रवृति से उठकर ही हम कर सकते जन राष्ट्र संगठन “-सुमित्रानंदन पंत प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है, यह दिन हमारी गौरवशाली मातृभाषा हिंदी के महत्व को बताता है। वैसे तो हिंदी को खुद मां का दर्जा प्राप्त है जो किसी दिवस की मोहताज नहीं है, वह हर भारतीय के भीतर खुद ही विद्यमान है। हिंदी दिवस को मनाने का उद्देश्य हमारी मातृभाषा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है और हिंदी के प्रति हमारे क्या-क्या कर्तव्य हैं उन्हें याद दिलाना है। हिंदी राजभाषा या राष्ट्रभाषा राजभाषा…