सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, लाल धान के बीज उत्पादन को प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र में डिजिटल सर्वेक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सोमेश्वर में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI), वाराणसी एवं ग्रामोत्थान रीप परियोजना के संयुक्त सहयोग से विकासखंड ताकुला के सोमेश्वर स्थित देवा मैरिज हॉल में आयोजित इस कार्यशाला में बेसलाइन सर्वे, हितधारक एवं लाभार्थी सर्वेक्षण तथा GIS मैपिंग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

कार्यशाला के तीसरे दिन, 31 अक्टूबर को विशेष रूप से लाल धान बीज उत्पादन, GPS आधारित फील्ड सर्वेक्षण और ऑनलाइन सर्वेक्षण की तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि किस प्रकार आधुनिक तकनीक का उपयोग कर किसानों से जुड़ी सटीक जानकारियां एकत्रित की जा सकती हैं और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रूप से दर्ज किया जा सकता है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के विशेषज्ञ डॉ. विक्रम दर्शाना सहित अन्य विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को तकनीकी जानकारी प्रदान की। उन्होंने लाल धान के बीज उत्पादन की प्रक्रिया, कृषि संबंधी आंकड़ों के संकलन और डिजिटल सर्वेक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने बताया कि किसानों की वास्तविक स्थिति, उनकी कृषि गतिविधियों और उपलब्ध संसाधनों से संबंधित सही जानकारी जुटाना कृषि योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बेहद जरूरी है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ताकुला क्षेत्र के विभिन्न सहकारी संस्थानों से जुड़े 25 सहकारिता स्टाफ ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को फील्ड में ले जाकर व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। इस दौरान उन्हें GPS के माध्यम से खेतों की लोकेशन दर्ज करने, ऑनलाइन सर्वेक्षण करने और प्राप्त जानकारियों को संबंधित पोर्टल पर अपडेट करने की प्रक्रिया समझाई गई।

कार्यशाला की खास बात यह रही कि सभी प्रतिभागियों ने स्वयं एक-एक किसान का सर्वेक्षण किया और किसान से संबंधित आवश्यक जानकारियां एकत्रित कर उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया। इस अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को डिजिटल सर्वेक्षण की वास्तविक प्रक्रिया को समझने और उसका व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों का सटीक एवं व्यवस्थित डाटा संकलित करना, डिजिटल सर्वेक्षण को बढ़ावा देना और लाल धान के बीज उत्पादन के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इसके साथ ही सहकारिता से जुड़े कर्मचारियों की तकनीकी क्षमता विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि वे भविष्य में किसानों तक कृषि से जुड़ी नई जानकारियां और तकनीकी सुविधाएं प्रभावी ढंग से पहुंचा सकें।

कार्यक्रम में आजीविका समन्वयक गणेश आर्या, मूल्यांकन, अनुश्रवण एवं वित्त सहायक दीपक सिंह, कृषि सहायक प्रवीण सिंह सहित ताकुला क्षेत्र के सहकारिता स्टाफ मौजूद रहे। इस तरह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि को नई तकनीक से जोड़ने, किसानों की वास्तविक जरूरतों को समझने और पारंपरिक फसलों के संरक्षण एवं उत्पादन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विशेष रूप से लाल धान जैसी स्थानीय फसलों के बीज उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने से क्षेत्र के किसानों के लिए कृषि के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

