नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भवाली में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। नीम करोली बाबा के इस विश्व प्रसिद्ध धाम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। खासतौर पर ‘हनुमान अंश’ फिल्म के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या में और तेजी से इजाफा होने की बात सामने आ रही है।
हाल ही में गांधी जयंती के आसपास मिले लॉन्ग वीकेंड में कैंची धाम और आसपास के इलाकों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हो गए थे। सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी रही। पर्यटकों और श्रद्धालुओं को होटल और ठहरने की जगह तक मिलने में परेशानी हुई। कई लोगों को रात सड़क किनारे या वाहनों में गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ा। बढ़ती भीड़ को देखते हुए अब प्रशासन और राज्य सरकार व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं। इसके तहत कैंची धाम में ऑनलाइन प्री-बुकिंग यानी रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को ही मिल सकता है प्रवेश
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने प्रशासन, पुलिस, संबंधित विभागों और पर्यटन कारोबारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। बैठक में कैंची धाम में लगातार बढ़ रही भीड़ और उससे पैदा हो रही ट्रैफिक एवं अन्य समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी दौरान श्रद्धालुओं की संख्या नियंत्रित करने के लिए ऑनलाइन प्री-बुकिंग सिस्टम का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर अधिकारियों और पर्यटन कारोबारियों ने सहमति जताई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्ताव लागू होने के बाद एक दिन में करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं को ही कैंची धाम में दर्शन की अनुमति दिए जाने की संभावना है। प्रशासनिक स्तर पर योजना को मंजूरी मिलने की बात सामने आई है, जबकि अब सरकार की अनुमति का इंतजार है। सरकार से हरी झंडी मिलते ही इसे लागू किया जा सकता है।
रजिस्ट्रेशन लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या को पहले से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे कैंची धाम के आसपास अचानक उमड़ने वाली भीड़ और ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा होटल और कमरों की उपलब्धता को लेकर भी बेहतर व्यवस्था बनने की उम्मीद है। पीक सीजन और छुट्टियों के दौरान मनमाने दाम वसूले जाने की शिकायतों पर भी नियंत्रण किया जा सकता है। पार्किंग, प्रसाद और अन्य सुविधाओं को लेकर भी व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। प्रस्ताव में मंदिर में एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग गेट बनाने की योजना भी शामिल है। फिलहाल एक ही गेट से श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है, जिससे भीड़ के समय परेशानी बढ़ जाती है।
फर्जी वेबसाइट और साइबर ठगी पर भी होगी नजर
कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी चिंता का विषय बन रहे हैं। ऐसे में रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू होने पर फर्जी वेबसाइटों और कैंची धाम के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी है। देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था पहले से लागू है। उत्तराखंड में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की चारधाम यात्रा के लिए भी पंजीकरण व्यवस्था लागू है। अब सबकी नजर सरकार की मंजूरी पर है। अगर कैंची धाम में भी ऑनलाइन प्री-बुकिंग व्यवस्था लागू होती है तो श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ ट्रैफिक, होटल, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन की वर्षों पुरानी चुनौती को काफी हद तक नियंत्रित करने की उम्मीद है।
