शहीद दिवस 2026: आज 23 मार्च को पूरे देश में शहीद दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन हमें उन वीर सपूतों की याद दिलाता है, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर भारत माता को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराया। खासतौर पर साल 1931 में इसी तारीख को भारत के तीन अमर शहीदों – भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगा लिया। उनकी यह कुर्बानी न सिर्फ ब्रिटिश हुकूमत को हिला गई, बल्कि लाखों भारतीयों के दिलों में देशभक्ति की ज्वाला जला दी। सोए हुए राष्ट्र को जागृत करने वाले इन वीरों का बलिदान हमें हमेशा याद दिलाता है कि आजादी कितनी अनमोल है और इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी है।
23 मार्च 1931 ऐतिहासिक दिन
23 मार्च 1931 को लाहौर की सेंट्रल जेल में सुबह करीब 7:30 बजे तीनों शहीदों को फांसी दी गई। भगत सिंह (23 वर्ष), राजगुरु (23 वर्ष) और सुखदेव (24 वर्ष) को लॉर्ड एयरकमांडर सॉन्डर्स की हत्या और दिल्ली विधानसभा में बम फेंकने के आरोप में ब्रिटिश अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन इन युवाओं का उद्देश्य सिर्फ हिंसा नहीं, बल्कि अंग्रेजी राज के खिलाफ जागृति फैलाना था। जेल में रहते हुए उन्होंने किताबें पढ़ीं, क्रांतिकारी विचारों को मजबूत किया और अंतिम क्षणों में भी “इंकलाब जिंदाबाद” और “भारत माता की जय” के नारे लगाए। फांसी के बाद उनके शवों को गुप्त रूप से सतलुज नदी के किनारे जलाया गया, ताकि जनता में उत्तेजना न फैले। लेकिन यह बलिदान ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला गया। महात्मा गांधी ने भी इसे स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण मोड़ माना।
23 मार्च का अन्य महत्वपूर्ण इतिहास
1940: ग्रेटर भारत योजना का प्रस्ताव पास हुआ।
1958: भारत के पहले गणमान्य नागरिक डॉ. राजेंद्र प्रसाद का निधन।
1994: पहला मोबाइल फोन लॉन्च (मोटोरोला)।
ये तारीखें हमें इतिहास के पन्नों से जोड़ती हैं।
फांसी के फंदे पर हंसे भगत सिंह, राजगुरु-सुखदेव संग,
इंकलाब की ललकार से गूंजा था लाहौर का आंगन।
आज भी उनकी कुर्बानी कहती है, आजादी अमर है!
30 जनवरी
साल के पहले ही महीने में 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के इतिहास में सबसे दुखद दिनों में से एक है, क्योंकि इसी दिन 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। महात्मा गांधी ने अहिंसा, सत्य और एकता के बल पर देश को आजादी दिलाई, और उनका बलिदान आज भी करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है। महात्मा गांधी के महान कार्यों को याद करते हुए उनकी पुण्यतिथि को भारत में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और महात्मा गांधी को याद किया जाता है।
23 मार्च
साल का दूसरा शहीद दिवस 23 मार्च को मनाया जाता है। आज 23 मार्च है ऐसे में हम आज के शहीद दिवस के बारे में भी जानेंगे। आज वह काला दिन है जब भारत की आजादी के लिए तीन महान क्रांतिकारियों ने अपनी जान की कुर्बानी हंसते-हंसते दे दी। आज ही के दिन राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह को फांसी दी गई थी। आज के दिन को हर साल देश के लिए जान गवांने वाले क्रांतिकारियों के सम्मान में शहीद दिवस के रूप में जाना जाता है। पूरे भारत में आज शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की पुण्यतिथि पर गहन श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। ये तीन महान क्रांतिकारी युवा पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रहेंगे।
21 अक्टूबर
साल का तीसरा और आखिरी शहीद दिवस 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसे उन पुलिसकर्मियों की याद में मनाया जाता है जिन्होंने कर्तव्यपालन करते हुए अपने जान की कुर्बानी दे दी है। इस दिन को पुलिस स्मृति दिवस या पुलिस शहीद दिवस के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन साल 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सेना द्वारा घातक हमला किया गया था, जिसमें 10 बहादुर पुलिस जवान शहीद हो गए थे। यह घटना भारत-चीन सीमा विवाद की शुरुआती निशानी थी, और तब से हर साल 21 अक्टूबर को पूरे देश की पुलिस फोर्सेस इस दिन को शहीदों की स्मृति में याद करती हैं।
सुखदेव की मुस्कान, राजगुरु का जोश उफान,
भगत सिंह का बलिदान, राष्ट्र रक्षा का संकल्प सदा।
शहीदों को सलाम, वंदे मातरम!
