देहरादून: उत्तराखंड अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में विशेष पहचान रखता है। यहां की परंपराएं, रीति-रिवाज और लोक संस्कृति हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। खासकर विवाह जैसे पवित्र बंधन में यहां की अलग-अलग क्षेत्रों—गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार—की अपनी-अपनी अनूठी परंपराएं हैं, जो इस विशेष अवसर को और भी यादगार बना देती हैं। इन्हीं परंपराओं की झलक देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र में देखने को मिली, जहां एक ही परिवार के पांच भाइयों का विवाह एक साथ, एक ही दिन और एक ही मंडप में संपन्न हुआ। यह अनोखा विवाह समारोह अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
चकराता तहसील के खरासी गांव में आयोजित इस भव्य समारोह ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे प्रदेश को आश्चर्यचकित कर दिया। बीते बुधवार को परिवार के पांच भाइयों—नरेंद्र, प्रदीप, प्रीतम, अमित और राहुल—ने पारंपरिक जौनसारी रीति-रिवाज “जोजोडा” के अनुसार विवाह की रस्में निभाईं। इस समारोह की सबसे खास बात यह रही कि पांचों भाइयों ने एक ही मंडप में बैठकर एक साथ सात फेरे लिए। जौनसारी संस्कृति की एक और दिलचस्प परंपरा इस विवाह में देखने को मिली, जहां दुल्हनों ने खुद बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंचकर विवाह की रस्में पूरी कीं। यह परंपरा आम भारतीय शादियों से बिल्कुल अलग है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे।
विवाह संबंधों की बात करें तो नरेंद्र का विवाह हय्यो गांव की अन्नु के साथ हुआ, प्रदीप ने जोगियों की निक्की को अपना जीवनसाथी बनाया, प्रीतम का विवाह पुनीता से हुआ, अमित ने गोरछा गांव की निर्मला के साथ सात फेरे लिए, जबकि राहुल ने जोगियों की आंचल के साथ विवाह किया। इस पूरे आयोजन की खास बात केवल पांच भाइयों का एक साथ विवाह ही नहीं था, बल्कि इसमें पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा, जहां ढोल-दमाऊ की धुनों और लोकगीतों के बीच यह आयोजन संपन्न हुआ।
इतना ही नहीं, परिवार में खुशियों का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। गुरुवार को परिवार की बेटी प्रियंका का विवाह मरलऊ गांव के रणवीर सिंह के साथ होना तय है, जिससे यह आयोजन और भी खास बन गया है। सोशल मीडिया पर इस अनोखे विवाह समारोह के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग इस परंपरा की जमकर सराहना कर रहे हैं और इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक विविधता का शानदार उदाहरण बता रहे हैं। यह विवाह समारोह न केवल एक पारिवारिक उत्सव था, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया कि आज के आधुनिक दौर में भी लोग अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े हुए हैं। चकराता का यह आयोजन आने वाले समय में एक मिसाल के तौर पर याद किया जाएगा, जिसने परंपरा और आधुनिकता के बीच खूबसूरत संतुलन पेश किया।
