द्वाराहाट: उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के कार्यकर्ताओं ने रविवार को मुख्य चौराहे पर प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का पुतला फूंककर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह आंदोलन गैरसैंण सत्र के दौरान विधानसभा घेराव के बाद हुई घटनाओं से उपजा आक्रोश है। कार्यकर्ताओं ने उक्रांद नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को तत्काल वापस लेने की मांग की और सरकार को चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। यह विरोध प्रदर्शन उत्तराखंड की राजधानी गैरसैंण को पूर्ण राजकीय मान्यता दिलाने की लंबे समय से चली आ रही मांग का हिस्सा है।
गैरसैंण सत्र के दौरान उक्रांद कार्यकर्ताओं ने विधानसभा का घेराव किया था, जिसके जवाब में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने गैरसैंण को लेकर विवादास्पद बयान दिया। वक्ताओं के अनुसार, इस बयान के विरोध में उक्रांद के नेता सड़कों पर उतरे थे। इसी दौरान वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी समेत कई नेताओं की गिरफ्तारी कर ली गई और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हो गए। इन घटनाओं ने कार्यकर्ताओं में सरकार के प्रति गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। मुख्य चौराहे पर आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम में उक्रांद के युवा प्रकोष्ठ के पूर्व केंद्रीय सचिव गोविंद अधिकारी, नगर अध्यक्ष सुशील साह, राज्य आंदोलनकारी विरेंद्र बजेठा, सैनिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष गुंजन साह, गौरव उपाध्याय, रवि जोशी, हिम्मत सिंह, मोहन सिंह, कृपाल सिंह, अनिल पांडे, नवीन जोशी, मदन राम, गोपाल सिंह, पूरन जोशी, बालम सिंह और ख्याली मैनाली जैसे प्रमुख नेता मौजूद रहे।
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नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जा रही आवाज को दबाने के लिए झूठे मुकदमे थोपे जा रहे हैं।उत्तराखंड क्रांति दल लंबे समय से राज्य की पहचान और विकास के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग उक्रांद का प्रमुख एजेंडा है। पार्टी का मानना है कि गैरसैंण पहाड़ी क्षेत्रों का सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र है, जो राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बयान को पार्टी ने अपमानजनक बताया है। वक्ताओं ने कहा कि सतपाल महाराज खुद गैरसैंण के मुद्दे पर अस्पष्ट रुख अपनाते रहे हैं, जबकि भाजपा सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।यह प्रदर्शन केवल एक घटना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की राजनीति में उभरते तनाव का संकेत है। विपक्षी दल लगातार सरकार पर स्थानीय मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं। उक्रांद कार्यकर्ताओं का कहना है कि मुकदमों की वापसी न होने पर आंदोलन तेज होगा और कार्यकर्ता शामिल होंगे। इससे न केवल सतपाल महाराज बल्कि पूरी भाजपा सरकार पर दबाव बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि गैरसैंण मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों में बड़ा फैक्टर बन सकता है।कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान पारंपरिक नारे लगाए और पुतला दहन कर अपना गुस्सा उतारा। यह घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर भी उक्रांद समर्थक सक्रिय हैं, जहां वे वीडियो और फोटो शेयर कर समर्थन जुटा रहे हैं। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। उक्रांद का यह कदम राज्य सरकार को सोचने पर मजबूर कर सकता है।यदि मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में ऐसे प्रदर्शन स्थानीय भावनाओं को भड़का सकते हैं। उक्रांद नेताओं ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे, लेकिन सरकार की उदासीनता के खिलाफ कोई कोर कसर न छोड़ेंगे। यह घटना उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ सकती है।
