पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड की चर्चित ब्लॉगर ज्योति अधिकारी शुक्रवार को पौड़ी पहुंचीं और अंकिता भंडारी के पैतृक गांव में उनके माता-पिता से मिलने गईं। इस भावुक मुलाकात की जानकारी उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की, जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं। अंकिता भंडारी की हत्या का मामला उत्तराखंड की राजनीति और समाज से जुड़ा एक ऐसा घाव है, जो आज भी ताजा है। चार साल बीत चुके हैं, लेकिन परिवार को अभी तक न्याय नहीं मिला। ऐसे में ज्योति अधिकारी का यह कदम न केवल परिवार के लिए समर्थन का प्रतीक है, बल्कि सोशल मीडिया की ताकत को भी दर्शाता है।ज्योति अधिकारी ने अपनी पोस्ट में बताया कि अंकिता के परिजन पिछले चार वर्षों से न्याय की खातिर दर-दर भटक रहे हैं। अंकिता की निर्मम हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। याद दिला दें, 2022 में ऋषिकेश के एक रिसॉर्ट में नौकरी करने गईं 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की संदिग्ध मौत हो गई थी। पूर्व मंत्री पुलकित आर्य समेत कई आरोपी इस मामले में नामित हैं, लेकिन न्याय प्रक्रिया ठप्प पड़ी हुई है।
ज्योति ने लिखा, अंकिता के परिवार को देखकर दिल दुखा। वे हर पल न्याय की आस में जी रहे हैं। मुझे इस घटना पर गहरा दुख है और पूरे परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे हर परिस्थिति में परिवार के साथ खड़ी रहेंगी।सोशल मीडिया पर अंकिता के परिवार और उनके घर को लेकर अक्सर नकारात्मक चर्चाएं होती रहती हैं। लोग बिना हकीकत जाने अफवाहें फैलाते हैं। लेकिन ज्योति अधिकारी ने खुद गांव पहुंचकर सच्चाई देखी। उन्होंने बताया कि परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजारा कर रहा है। घर की हालत देखकर कोई भी इंसान का दिल पसीज जाए। ज्योति ने कहा, परिवार की एकमात्र मांग है – अंकिता को न्याय मिले। सोशल मीडिया की ताकत से हम इस लड़ाई को मजबूत करेंगे। उनका यह बयान न केवल परिवार के दर्द को उजागर करता है, बल्कि उन ट्रोल्स को भी करारा जवाब है जो बिना सोचे-समझे टिप्पणियां करते हैं।
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यह घटना उत्तराखंड के सामाजिक और न्यायिक परिदृश्य पर सवाल खड़े करती है। अंकिता जैसी बेटी की हत्या के बाद भी अपराधी खुले घूम रहे हैं, यह व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है। ज्योति अधिकारी जैसे ब्लॉगर्स और एक्टिविस्ट्स अब आवाज उठा रहे हैं। ज्योति उत्तराखंड की प्रमुख सोशल मीडिया पर्सनैलिटी हैं, जिनके लाखों फॉलोअर्स हैं। उनकी यह पहल निश्चित रूप से मामले को नई गति देगी। उन्होंने परिवार के साथ फोटो भी शेयर की, जिसमें उनके चेहरे पर दर्द साफ झलक रहा था। ज्योति ने लिखा, आज उनका दुख बांटने की कोशिश की। आगे भी इस लड़ाई में साथ दूंगी।
उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर यह घटना एक मील का पत्थर है। सरकार और प्रशासन को अब ठोस कदम उठाने चाहिए। ज्योति अधिकारी का समर्थन परिवार के लिए उम्मीद की किरण है। सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि न्याय की लड़ाई का हथियार बन चुका है। अंकिता के परिवार की पुकार अब पूरे देश तक पहुंचनी चाहिए। ज्योति जैसे युवा इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। क्या यह मुलाकात न्याय की राह में नया मोड़ लाएगी? समय ही बताएगा, लेकिन ज्योति का संकल्प प्रेरणादायक है।
अंकिता भंडारी के पिता ने की ये मांग
अंकिता हत्याकांड को लेकर एक बार फिर पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं. अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने कहा कि-हमें जानकारी मिली है कि मामले में सीबीआई जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘वीआईपी’ की पहचान उजागर करना है. घटना के दिन यमकेश्वर की विधायक रेणु बिष्ट की कॉल डिटेल पूरी तरह निकाली जानी चाहिए. साथ ही जिन-जिन भाजपा से जुड़े लोगों के नाम कथित वीआईपी के तौर पर सामने आ रहे हैं, उन सभी की कॉल डिटेल और लोकेशन भी जांची जानी चाहिए. इससे साफ हो जाएगा कि घटना के दिन और उसके आसपास ये सभी लोग कहां मौजूद थे.
-वीरेंद्र भंडारी, अंकिता के पिता-
अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने मांग की कि जांच पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हो और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाया न जाए, ताकि उनकी बेटी को न्याय मिल सके और सच सामने आ सके.
कौन हैं ज्योति अधिकारी?
ज्योति अधिकारी उत्तराखंड की ब्लॉगर और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर हैं. बीते दिनों वो अंकिता भंडारी मामले को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन में पहुंची थीं. इस दौरान उन्होंने खुलेआम दरांती लहराई थी. पहाड़ी महिलाओं के लिए कथित रूप से अपशब्द कहे थे. ऐसा भी आरोप लगा कि ज्योति ने लोक देवताओं के अस्तित्व पर सवाल खड़े किए थे. इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर ज्योति से पूछताछ कर उन्हें हिरासत में ले लिया था. कोर्ट से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
