नोएडा: गौतमबुद्ध नगर जिले में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा कर्मचारियों का प्रदर्शन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। शुरुआत में शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ यह आंदोलन अब न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर भी भारी पड़ रहा है।
एनएसईजेड मेट्रो स्टेशन, एलिवेटेड रैंप और दादरी-सूरजपुर रोड समेत कई प्रमुख मार्गों पर कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन और जाम के चलते लोगों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुलेसरा से ग्रेटर नोएडा की ओर जाने वाला रास्ता कई बार पूरी तरह बाधित रहा, जिससे ऑफिस जाने वाले, छात्र और आम यात्री खासे प्रभावित हुए।
इस स्थिति का फायदा उठाते हुए कई ऑटो चालकों ने किराया मनमाने ढंग से बढ़ा दिया है। जहां पहले ₹10 किराया लिया जाता था, वहां अब ₹20 वसूले जा रहे हैं, और ₹20 वाले रूट पर ₹40 तक मांगे जा रहे हैं। ऑटो चालकों का तर्क है कि जब कर्मचारी अपनी आय बढ़ाने के लिए आंदोलन कर सकते हैं, तो उन्हें भी अपनी कमाई बढ़ाने का अधिकार है। हालांकि, इस फैसले से यात्रियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
एक महिला यात्री ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वह सुबह से ऑटो का इंतजार कर रही थीं, लेकिन कम ऑटो और अधिक किराए के कारण उन्हें ऑफिस पहुंचने में काफी देर हो गई। रोजाना सफर करने वाले हजारों लोगों के लिए यह स्थिति एक बड़ी समस्या बन गई है। वहीं, प्रदर्शन ने अब हिंसक रूप भी ले लिया है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, मदरसन कंपनी के पास प्रदर्शनकारियों ने करीब चार गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। हालात बिगड़ते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया गया।
इतना ही नहीं, गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की एक गाड़ी को पलट दिया और उसमें आग लगा दी। इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन स्थिति को काबू में करने की कोशिश कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारी नोएडा फेज-2 क्षेत्र की कई कंपनियों से जुड़े हैं, जिनमें ऋचा ग्लोबल, रेनबो, पैरामाउंट, एसएनडी और अनुभव जैसी कंपनियां शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक ओर जहां मजदूरों की आर्थिक समस्याओं को उजागर किया है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था और आमजन की परेशानियों को भी सामने ला दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन और कंपनियां इस गंभीर स्थिति का समाधान कैसे निकालती हैं, ताकि जल्द से जल्द लोगों को राहत मिल सके और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
