विकासनगर: उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र में आज सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। हिमाचल प्रदेश की एक रोडवेज बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई, जिसमें दो महिलाओं और एक पुरुष की मौके पर ही मौत हो गई। यह बस नेरवा से पांवटा साहिब जा रही थी और हरिपुर-कोटी-मीनस राजमार्ग पर क्वानू के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) की टीमों ने तत्परता से बचाव कार्य शुरू कर दिया है। घायलों को निकालने का प्रयास जारी है, लेकिन खाई की गहराई और दुर्गम इलाके के कारण अभियान में चुनौतियां आ रही हैं।
हादसे की जानकारी मिलते ही विकासनगर थाने की पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में पता चला कि बस में करीब 30-35 यात्री सवार थे। बस चालक की लापरवाही या सड़क पर फिसलन को हादसे का कारण माना जा रहा है। सुबह के समय पहाड़ी इलाके में कोहरा और ठंड के कारण सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं। नेरवा से पांवटा साहिब के बीच यह मार्ग पहाड़ी और संकरी सड़कों से गुजरता है, जहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। अब तक पुष्टि हुई मौतों में दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं, जिनकी पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। कई यात्री गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें निकटतम अस्पताल पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
एसडीआरएफ के कमांडेंट ने बताया कि टीम ने रस्सियों और क्रेन की मदद से बचाव कार्य तेज कर दिया है। खाई बहुत गहरी है, लगभग 200 फीट नीचे बस के अवशेष बिखरे पड़े हैं। हमारी प्राथमिकता घायलों को सुरक्षित निकालना है। मौसम खराब होने से हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल मुश्किल है, उन्होंने कहा। स्थानीय लोग भी सहायता के लिए पहुंचे हैं। जिला प्रशासन ने हादसे वाली जगह पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया है, जिससे पांवटा-पठानकोट मार्ग पर वाहनों को वैकल्पिक रूट लेना पड़ रहा है।यह हादसा उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सड़क सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों को फिर से उजागर करता है।
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देहरादून से सटे विकासनगर ब्लॉक में हरिपुर-कोटी-मीनस राजमार्ग एक महत्वपूर्ण लिंक है, जो हिमाचल और उत्तराखंड को जोड़ता है। लेकिन संकरी सड़कें, गहरी खाइयां और मौसमी चुनौतियां यहां हादसों को आम बना देती हैं। पिछले साल ही इसी क्षेत्र में दो बस दुर्घटनाओं में 15 से अधिक लोगों की जान गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक स्पॉट्स पर रेलिंग, साइनेज और चौड़ीकरण के बावजूद कार्य धीमा है। हिमाचल रोडवेज बसें अक्सर इन मार्गों पर चलती हैं, लेकिन ड्राइवरों को पहाड़ी ड्राइविंग ट्रेनिंग की कमी साफ नजर आती है।उत्तराखंड सरकार ने पहले ही सड़क सुरक्षा अभियान शुरू किया है, जिसमें स्पीड लिमिट, सीसीटीवी और एम्बुलेंस तैनाती शामिल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए घायलों के इलाज के लिए तत्काल निर्देश दिए हैं।
विपक्षी दल भी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय विधायक ने मांग की है कि क्वानू जैसे संवेदनशील स्थानों पर तुरंत सुरक्षा उपाय किए जाएं।यह घटना न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पर्यटक मौसम में बढ़ते वाहन ट्रैफिक को नियंत्रित करने की जरूरत बताती है। बस संचालकों को सलाह दी जाती है कि पहाड़ी रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी बरतें। फिलहाल बचाव कार्य जारी है, और मृतक परिवारों को मुआवजे की घोषणा की उम्मीद है। विकासनगर और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई है। अधिक जानकारी के लिए प्रशासनिक अपडेट का इंतजार है।
