द्वाराहाट: पाली पछांऊ क्षेत्र में आयोजित होने वाला पौराणिक स्याल्दे बिखौती मेला इस वर्ष 13 अप्रैल से पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हो रहा है। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण भी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मेले का शुभारंभ सोमवार शाम 4 बजे विभांडेश्वर मंदिर में होगा, जहां रणां ग्रामवासियों द्वारा नगाड़ों और निशानों के साथ मंदिर की परिक्रमा की जाएगी। इस भव्य आयोजन के साथ ही मेले की औपचारिक शुरुआत होगी। उद्घाटन अवसर पर विभिन्न विद्यालयों और सांस्कृतिक टीमों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे, जो देर रात तक दर्शकों का मन मोहते रहेंगे।
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रात होते-होते मेले का स्वरूप और भी भव्य हो उठेगा, जब आल, गरख और नौज्यूला धड़ों से जुड़े विभिन्न गांवों के रणबांकुरे पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोल-नगाड़ों, रणसिंघों, दुंदुभियों और बीनबाजों के साथ मेले में पहुंचेंगे। हुड़के और चिमटे की थाप पर गूंजते झोड़ा-चांचरी गीत वातावरण को लोकसंगीत से सराबोर कर देंगे। सभी दल मंदिर परिसर में अपने निर्धारित स्थानों पर एकत्र होकर परंपरागत रीति से भाग लेंगे। अगली सुबह श्रद्धालु सरस्वती, सुरभि और नंदिनी नदियों के संगम स्थल पर स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे और इसके बाद मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना करेंगे। यह धार्मिक अनुष्ठान मेले की पवित्रता और आस्था को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है। स्नान और पूजा के बाद श्रद्धालु अपने-अपने गांवों को प्रस्थान करते हैं।
13 अप्रैल को ही द्वाराहाट नगर में बट पुजै मेले का आयोजन भी किया जाएगा। इस दौरान विद्यालयों द्वारा सांस्कृतिक जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें स्थानीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। शाम 4 बजे नौज्यूला धड़े की ओर से ओड़ा भेंटने की पारंपरिक रस्म अदा की जाएगी, जो मेले की प्रमुख परंपराओं में से एक है। इसके पश्चात शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 15 अप्रैल को मुख्य स्याल्दे मेले में गरख और आल धड़ों की ओर से ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई जाएगी।
इस अवसर पर झोड़ा-भगनौल गायन से पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्सवपूर्ण हो उठेगा। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। मेले का समापन 16 अप्रैल को व्यापारिक मेले और मीना बाजार के रूप में होगा। इस दिन क्षेत्रीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगेगी, जहां स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र और अन्य उत्पादों की झलक देखने को मिलेगी। यह मेला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाता है।
