अल्मोड़ा: उत्तराखंड के राजनीतिक पटल पर एक ऐसी दुखद खबर ने शोक की लहर दौड़ा दी है, जो पूरे पहाड़ी राज्य को स्तब्ध कर रही है। दिल्ली के प्रतिष्ठित एम्स अस्पताल से मंगलवार को आई खबर के अनुसार, अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण विकासखंड के नवनिर्वाचित ब्लॉक प्रमुख सतीश नैनवाल का असामयिक निधन हो गया। मात्र कुछ ही महीनों पहले पंचायत चुनावों में जीत हासिल करने वाले इस युवा नेता का जाना न केवल उनके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समूचे उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक जगत के लिए भी एक बड़ा आघात साबित हुआ है।सतीश नैनवाल रानीखेत विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल के छोटे भाई थे। हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों में उन्होंने भिकियासैंण ब्लॉक प्रमुख का पद जीतकर क्षेत्रवासियों का भरोसा जीता था। उनकी सक्रियता, जनसेवा के प्रति समर्पण और युवा ऊर्जा ने उन्हें ग्रामीण स्तर पर एक लोकप्रिय चेहरा बना दिया था।
बताया जाता है कि गुर्दे की गंभीर बीमारी से जूझ रहे सतीश का इलाज दिल्ली एम्स में चल रहा था। मंगलवार सुबह ही उन्होंने अंतिम सांस ली, जिसकी सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव भतरोजखान और पूरे अल्मोड़ा जिले में सन्नाटा छा गया। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार देर रात तक भतरोजखान पहुंचने की उम्मीद है, जबकि बुधवार, 11 फरवरी को बेतालघाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सतीश के निधन से सबसे अधिक प्रभावित उनके बड़े भाई और रानीखेत विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल हैं। विधायक ने इस दुखद घटना पर गहन शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भाई का अचानक चले जाना पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ गया है। प्रमोद नैनवाल स्वयं एक सक्रिय नेता हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनावों में अपनी मेहनत से जीत हासिल की थी। सतीश उनके छोटे भाई होने के साथ-साथ उनके राजनीतिक सहयोगी भी थे।
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दोनों भाइयों की जोड़ी क्षेत्र में विकास के लिए जानी जाती थीं। सतीश की कमी अब न केवल परिवार बल्कि भिकियासैंण ब्लॉक के हजारों ग्रामीणों को खलेगी, जहां वे सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय थे।यह खबर उत्तराखंड के राजनीतिक हलकों में भी गूंज रही है। विभिन्न दलों के नेता सोशल मीडिया और बयानों के माध्यम से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों ने सतीश को एक उभरते हुए युवा नेता के रूप में याद किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ट्वीट कर शोक संदेश दिया, जबकि स्थानीय विधायक ने अंतिम संस्कार में शामिल होने की घोषणा की।
सतीश का जाना पहाड़ी राजनीति में युवाओं के लिए एक सबक है कि स्वास्थ्य को कभी नजरअंदाज न करें। ग्रामीण स्तर पर सक्रिय ऐसे नेताओं की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी, और सतीश जैसे युवा का योगदान याद रखा जाएगा।सतीश नैनवाल का सफर छोटा जरूर था, लेकिन प्रभावशाली। पंचायत चुनावों में उनकी जीत ने साबित किया था कि जनता युवा और मेहनती नेताओं को पसंद करती है। उनका निधन उत्तराखंड को एक समर्पित सेवक से वंचित कर गया। भतरोजखान और बेतालघाट में बुधवार को होने वाले अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल होने की संभावना है। इस दुख की घड़ी में पूरे राज्य की प्रार्थनाएं उनके परिवार के साथ हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस आघात को सहने की शक्ति दें। उत्तराखंड ने एक होनहार बेटे को खो दिया है।
