देहरादून: देहरादून में रविवार को न्याय की पुकार एक बार फिर सड़कों पर गूंज उठी। अंकिता भंडारी हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और सीबीआई जांच की मांग को लेकर हज़ारों लोग राजधानी की सड़कों पर उतरे। भीड़ में युवाओं से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक सभी तबके के लोग शामिल थे, जिन्होंने एक स्वर में कहा—“अंकिता को न्याय दो।”यह विशाल रैली परेड ग्राउंड से शुरू हुई, जहां सुबह करीब 11 बजे तक विभिन्न सामाजिक, छात्र और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि इकट्ठा हुए।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, सीपीआई, बेरोजगार संघ, उत्तराखंड मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति, गढ़वाल सभा महिला मंच सहित कई संगठनों के कार्यकर्ताओं ने न्याय की इस लड़ाई में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।जैसे-जैसे रैली आगे बढ़ी, शहर के कई हिस्सों में नारेबाजी और गीतों के माध्यम से लोगों ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। इससे देहरादून के माहौल में गहरी सामाजिक चेतना की झलक दिखी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। कई महिलाएं पोस्टर और बैनर थामे ‘सीबीआई जांच कराओ, दोषियों को सजा दिलाओ’ के नारे लगा रही थीं।रैली जब हाथीबड़कला क्षेत्र पहुंची तो पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी।
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मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। इस दौरान कुछ स्थानों पर हल्की झड़पें भी हुईं, लेकिन भीड़ ने संयम से काम लेते हुए शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया। सड़कें “हमारी बहन के लिए न्याय” के नारों से गूंज उठीं।धरना स्थल पर मंच से कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया। उत्तराखंड मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के मोहित डिमरी ने घोषणा की कि 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि न्याय की यह लड़ाई जनता की है और पूरे राज्य को इसमें एक साथ खड़ा होना चाहिए। विभिन्न व्यापारिक और सामाजिक संगठनों से संवाद कर बंद को सफल बनाने का आह्वान भी किया गया।वहीं, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं, बल्कि पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि “सीबीआई जांच ही सच्चाई को सामने ला सकती है और इसी से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है।
इस प्रदर्शन में पर्वतीय अस्मिता का जोश भी देखने को मिला। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे शांत राज्य में ऐसी क्रूर घटनाओं का होना दुर्भाग्यपूर्ण है और अब समाज को एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगना चाहिए।रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों में कई युवाओं ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ अंकिता के लिए नहीं, बल्कि हर उस बेटी के लिए है जो न्याय की राह में संघर्ष कर रही है। कई लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर और शांति गीत गाकर अपने विचार प्रकट किए।दिन भर देहरादून पुलिस तैनात रही, हालांकि समूचा प्रदर्शन शांतिपूर्ण माहौल में हुआ।
शाम होते-होते प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर जल्द ही सीबीआई जांच की औपचारिक घोषणा नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।अंकिता भंडारी हत्याकांड न केवल एक अपराध की जांच का विषय रह गया है, बल्कि यह अब राज्य की सामाजिक चेतना, महिला सुरक्षा और शासन की जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है। देहरादून में उमड़ा यह जनसैलाब यही संदेश देता है—न्याय की राह कठिन हो सकती है, लेकिन जब जनता एक साथ खड़ी हो, तब सच्चाई की आवाज दब नहीं सकती।
