देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में विपक्ष के लगातार तीखे हमलों के बीच राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पक्ष सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में किसी भी जांच से भाग नहीं रही है, बल्कि यदि विपक्ष के पास कोई नया सबूत है तो उसे सामने लाए, सरकार हर स्तर की जांच के लिए तैयार है।मंत्री उनियाल ने कहा कि इस मामले में गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) ने पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की है, और इस जांच को न केवल सत्र न्यायालय, बल्कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है। उन्होंने दो टूक कहा — “कोर्ट ने खुद माना था कि सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है।”उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस संवेदनशील मुद्दे को बार-बार राजनीतिक मंचों पर उठाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। “विपक्ष का उद्देश्य न्याय नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ लेना है,” मंत्री ने कहा।
उन्होंने जोड़ा कि राज्य सरकार शुरू से इस मामले में गंभीर रही है और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए हर कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। यह मामला सितंबर 2022 में सामने आया जब गंगा भोगपुर रिसॉर्ट में काम करने वाली रिसेप्शनिस्ट अंकिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या हुई। इस घटना के बाद प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया था और जनता ने तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। सरकार ने जांच को लेकर तेज कदम उठाते हुए एसआईटी गठित की थी, जिसके बाद मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य सहित अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था।मंत्री उनियाल ने कहा कि सरकार ने जांच में किसी तरह का दबाव नहीं डाला।
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“एसआईटी ने सबूतों, गवाहों और तकनीकी पहलुओं के आधार पर चार्जशीट तैयार की, और कोर्ट में यही तथ्य प्रस्तुत किए गए,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि अदालतों ने भी एसआईटी की जांच प्रक्रिया पर विश्वास जताया है और सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया है।वहीं, विपक्ष का कहना है कि सरकार जांच को प्रभावित कर रही है और पीड़िता को न्याय दिलाने में गंभीर नहीं है। विपक्षी दलों का आरोप है कि कई साक्ष्य जांच प्रक्रिया के दौरान नष्ट किए गए, और आरोपितों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। कांग्रेस नेताओं ने हाल के दिनों में इस घटना को लेकर कई बार राज्य सरकार पर निशाना साधा है और सीबीआई जांच की मांग दोहराई है।प्रेस वार्ता में मंत्री उनियाल ने कहा कि न्यायालय का निर्णय ही सर्वमान्य होना चाहिए। जब सर्वोच्च न्यायालय तक ने माना कि जांच निष्पक्ष हुई है, तो बार-बार इस मामले को राजनीतिक रंग देना गलत है।
सरकार कानून और संविधान की मर्यादा में रहकर ही काम कर रही है,” उन्होंने स्पष्ट किया।उन्होंने विपक्ष से अपील की कि यदि उनके पास कोई ठोस साक्ष्य है, तो वे उसे कोर्ट में पेश करें या सरकार को सौंपें। “हम पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन राजनीति के लिए इस दर्दनाक घटना का इस्तेमाल न किया जाए,” मंत्री ने कहा।इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी फिर से तेज हो गई है। जहां समर्थक सरकार की पारदर्शिता की तारीफ कर रहे हैं, वहीं विपक्ष सरकार पर पुराने सवाल दोहरा रहा है। अंकिता भंडारी हत्याकांड आज भी उत्तराखंड की जनता के दिल में जिंदा है — और सवाल वही बना हुआ है: क्या न्याय की अंतिम कड़ी तक पहुंचने में अब भी कोई कसर बाकी है?
