हल्द्वानी। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली इन्फ्लूएंसर ज्योति अधिकारी देवभूमि उत्तराखंड में इन दिनों सुर्खियों में हैं। देवी-देवताओं और महिलाओं पर कथित अभद्र टिप्पणी के आरोप में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को अदालत में पेशी के बाद कोर्ट ने ज्योति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मामला उत्तराखंड में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया की सीमाओं और धार्मिक भावनाओं के सम्मान के बीच तेजी से उठी बहस को एक बार फिर सामने ले आया है। गुरुवार देर शाम पुलिस ने ज्योति को उनके घर से गिरफ्तार किया। संबंधित प्रकरण में मुखानी थाने की पुलिस ने कार्रवाई की थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ज्योति के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता जूही चुफाल की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप है कि ज्योति ने अपने एक इंस्टाग्राम वीडियो में स्थानीय देवी-देवताओं के अस्तित्व पर प्रश्न उठाए और कुमाऊं की महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की। शिकायत दर्ज होने के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ देना शुरू कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और अदालत में पेशी
मुखानी थाना पुलिस ने आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज करते हुए ज्योति को गिरफ्तार किया। शुक्रवार दोपहर उन्हें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस दौरान अदालत परिसर के बाहर समर्थकों और विरोधियों दोनों का जमावड़ा देखा गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ज्योति के वीडियो से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका थी। उन्होंने बताया कि जांच जारी है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
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गिरफ्तारी से पहले साझा किया गया वीडियो
गिरफ्तारी से ठीक पहले ज्योति अधिकारी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि पुलिस की ओर से उन्हें नोटिस मिला है और 10 से 12 पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे थे। वीडियो में ज्योति ने कहा था, डरना नहीं है, डराने की पूरी कोशिश की जा रही है। इंसाफ की लड़ाई न कभी रुकी है और न रुकेगी। इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बँट गया। कुछ लोगों ने ज्योति के समर्थन में आवाज उठाई और मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया, जबकि कई यूज़र्स और सामाजिक संगठनों ने इसे धार्मिक आस्थाओं का अपमान करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की।
अभिव्यक्ति और आस्था की सीमाओं पर बहस
ज्योति अधिकारी का यह विवाद सिर्फ एक व्यक्तिगत मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश में सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक मान्यताओं के बीच की पतली रेखा पर एक नई चर्चा को जन्म दे रहा है। जहां एक ओर आधुनिक डिजिटल दौर में राय व्यक्त करना आसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक मंचों पर कही गई बातें समाज के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकती हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई सामग्री को सामान्य राय नहीं माना जा सकता क्योंकि यह हजारों लोगों तक तुरंत पहुँचती है। इसलिए अभिव्यक्ति की आज़ादी का प्रयोग करते समय सार्वजनिक जिम्मेदारी भी जरूरी है।
