द्वाराहाट: द्वाराहाट वन क्षेत्र में भालू के हमले ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी, लेकिन वन विभाग की फुर्तीली कार्रवाई ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया। 18 दिसंबर 2025 को खजुरानी अनुभाग के खीड़ा बीट स्थित वन पंचायत जमणियां और रामपुर की दो महिलाओं पर भालू ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घटना की खबर मिलते ही अल्मोड़ा के प्रभागीय वन अधिकारी, उप प्रभागीय वन अधिकारी, द्वाराहाट वन क्षेत्राधिकारी और चौखुटिया वन क्षेत्र की टीम ने तुरंत घटनास्थल का निरीक्षण किया। घायलों को मौके पर पहुंचकर तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की गई और उचित मुआवजे के लिए सभी जरूरी दस्तावेज उच्च अधिकारियों को भेजे गए। खुशी की बात यह है कि मुआवजा भुगतान समय पर पूरा हो चुका है, जिससे पीड़ित परिवारों को राहत मिली।यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में आम हो रही है। वन विभाग ने इसे हल्के में नहीं लिया।
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भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए गए। क्षेत्र में नियमित गश्त शुरू कर दी गई है, ताकि भालू की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। निगरानी के लिए अत्याधुनिक उपकरण जैसे एनाइडर और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जो वन्यजीवों की हर हलचल को कैद कर रहे हैं। वन कर्मी गश्त के दौरान लाउडस्पीकर से ग्रामीणों को सतर्क रहने और बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, झाड़ियों में घुसने से बचें, रात में अकेले न निकलें और पशुओं को बांधकर रखें—ऐसी सलाहें घर-घर पहुंचाई जा रही हैं। भालू को पकड़ने के प्रयास में पिंजरा भी लगाया गया था, लेकिन संबंधित स्थल पर भालू की कोई गतिविधि न मिलने पर 7 फरवरी 2026 को इसे स्थानांतरित कर दिया गया। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर वन पंचायत जमणियां और रामपुर में झाड़ी कटाई का कार्य तेजी से किया गया।
सरपंचों के साथ स्थलीय निरीक्षण और मापन के बाद, उप प्रभागीय वन अधिकारी के आदेश पर विभागीय प्राक्कलन के अनुसार दोनों वन पंचायतों के खातों में धनराशि का भुगतान 7 फरवरी 2026 को ही कर दिया गया। यह कदम न केवल संघर्ष रोकने में मददगार साबित होगा, बल्कि स्थानीय समुदायों का विश्वास भी बढ़ाएगा।उत्तराखंड के वन क्षेत्रों में भालू, तेंदुए जैसे वन्यजीवों से मानव संघर्ष बढ़ रहा है, जो जंगलों के सिकुड़ने और मानवीय अतिक्रमण का नतीजा है। अल्मोड़ा वन विभाग का यह मॉडल अन्य जिलों के लिए प्रेरणादायक है। त्वरित मुआवजा, तकनीकी निगरानी और जागरूकता अभियान से विभाग ने साबित कर दिया कि वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा साथ-साथ चल सकते हैं। ग्रामीणों को भी अब सतर्कता बरतनी होगी, ताकि ऐसी घटनाएं टल सकें। वन विभाग की इस पहल की सराहना होनी चाहिए।


