नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली से सोमवार को एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर क्षेत्र स्थित मदीना मस्जिद के पास यमुना नदी में चार लोगों की डूबने की आशंका ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी। घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस (DFS), गोताखोरों और दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) की टीमें मौके पर पहुंचीं और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब 7:20 बजे दिल्ली फायर सर्विस को सूचना मिली कि जीरो पुस्ता, ठोकर नंबर-17 के पास यमुना नदी में चार लोग डूब गए हैं। सूचना मिलते ही महज दो मिनट के भीतर दमकल विभाग की दो गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंच गईं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।
बचाव अभियान के दौरान एक शव नदी से बाहर निकाल लिया गया। मृतक की पहचान सोनू के रूप में हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। वहीं, तीन अन्य बच्चों सचिन, हेमंत और राजन की तलाश लगातार जारी है। हालांकि देर रात अंधेरा बढ़ने के कारण रेस्क्यू अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि सुबह होते ही दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया, जिसमें गोताखोरों और बचाव दल की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ लगी हुई हैं दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चारों बच्चे किन परिस्थितियों में यमुना नदी तक पहुंचे और हादसा कैसे हुआ। पुलिस और संबंधित एजेंसियां घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के सही कारणों का पता लगाया जा सके।
फायर ऑफिसर देशपाल सिंह ने बताया कि सूचना मिलने के बाद सभी संबंधित एजेंसियों को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। बचाव अभियान में दिल्ली फायर सर्विस, प्रशिक्षित गोताखोरों और DDMA की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। उनका कहना है कि जब तक लापता तीनों बच्चों का पता नहीं चल जाता, तब तक सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और हर किसी की निगाहें रेस्क्यू टीमों पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोग भी घटनास्थल पर बड़ी संख्या में मौजूद हैं और लापता बच्चों के सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं। हालांकि समय बीतने के साथ उम्मीदें भी कमजोर होती जा रही हैं।
यमुना नदी में इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के कई हिस्सों में गहराई अचानक बढ़ जाती है और तेज बहाव के कारण लोगों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी बोर्ड लगाए जाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी के किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं और बच्चों को अकेले नदी के पास बिल्कुल न जाने दें। थोड़ी सी लापरवाही भी ऐसे बड़े हादसों का कारण बन सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही लापता बच्चों के बारे में कोई जानकारी सामने आएगी। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि जलाशयों और नदियों के आसपास सुरक्षा नियमों का पालन करना कितना जरूरी है। प्रशासन की ओर से चलाया जा रहा राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है।
