वन पंचायत झुडँगा में इन दिनों तेंदुए का आतंक चरम पर है। बीते एक सप्ताह के भीतर दो मवेशियों को तेंदुए द्वारा अपना निवाला बनाए जाने की घटनाओं ने पूरे गांव को भय और असुरक्षा के माहौल में धकेल दिया है। लगातार बढ़ती घटनाओं के चलते ग्रामीणों में दहशत के साथ-साथ वन विभाग के प्रति आक्रोश भी साफ देखा जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार तेंदुआ अब केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई बार उसे दिन-दहाड़े आबादी वाले क्षेत्रों में घूमते हुए देखा गया है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि दिन के समय तेंदुए का गांव के आसपास दिखाई देना मानव जीवन के लिए भी खतरे का संकेत है। लोगों ने बताया कि बच्चे और महिलाएं अब घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं, जबकि मवेशियों को चराने ले जाना भी जोखिम भरा हो गया है।
ताजा घटना 19 अप्रैल की दोपहर की है, जब गांव निवासी महेश कुमार की गाय रोज की तरह जंगल में चरने के लिए गई थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे तेंदुए ने अचानक गाय पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना से पशु स्वामी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इससे पहले, लगभग एक सप्ताह पूर्व गांव के ही मानसिंह के भैंस के बछड़े को भी तेंदुए ने मार डाला था। लगातार हो रही इन घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता को और बढ़ा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले ही वन विभाग को इस समस्या से अवगत कराते हुए पिंजरा लगाने की मांग की थी, ताकि तेंदुए को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सके। इसके लिए डीएफओ अल्मोड़ा को भी सूचना दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग की इस लापरवाही के चलते ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।
घटना की सूचना मिलते ही सरपंच नन्द किशोर तुरंत मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया। उन्होंने वन विभाग को घटना की जानकारी देते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पशु स्वामी महेश कुमार के साथ पुष्पा देवी, मुन्नी देवी, इंदिरा देवी, नीरज कुमार, दीपक कुमार सहित कई ग्रामीण भी मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि वन विभाग को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए त्वरित कदम उठाने चाहिए, ताकि गांव में फैले भय के माहौल को खत्म किया जा सके और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वन्यजीव और मानव के बीच बढ़ते टकराव को उजागर किया है। जरूरत है कि प्रशासन और वन विभाग मिलकर ऐसी घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण करें, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।
