हल्द्वानी: उत्तराखंड के रानीबाग क्षेत्र में एक बार फिर सोशल मीडिया ब्लॉगर्स का विवाद सुर्खियों में आ गया है। बिग बॉस फेम अनुराग डोभाल के बाद अब एक और ब्लॉगर ज्योति अधिकारी ने इंटरनेट मीडिया पर लाइव आकर सुसाइड करने की धमकी दे दी। शनिवार शाम को यह घटना शीतला माता मंदिर के पास जंगल में घटी, जहां ज्योति रोते-बिलखते हुए पुलिस और एक महिला ब्लॉगर पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाती नजर आईं। सौभाग्य से पुलिस ने समय रहते मौके पर पहुंचकर उन्हें बचा लिया और निजी अस्पताल में भर्ती कराया।यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। ज्योति ने अपने 25 मिनट से ज्यादा लंबे लाइव वीडियो में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक महिला ब्लॉगर लगातार उनके चरित्र पर कीचड़ उछाल रही है, लेकिन पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही।
ज्योति का कहना था कि इसी मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया। वीडियो में वे भावुक होकर रोती हुईं नजर आ रही थीं, जो दर्शकों के बीच सहानुभूति और सवालों का दौर पैदा कर गया। रानीबाग थाना प्रभारी (एसएचओ) विजय मेहता ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने फौरन कार्रवाई की। “हमने ज्योति को सकुशल बरामद कर लिया है। वे पूरी तरह ठीक हैं और अस्पताल में इलाज चल रहा है। मामला संवेदनशील है, हम जांच कर रहे हैं,” उन्होंने कहा। पुलिस का कहना है कि ज्योति को कोई शारीरिक चोट नहीं लगी, लेकिन मानसिक रूप से वे परेशान हैं। फिलहाल, उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आरोपों की पड़ताल की जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड के ब्लॉगिंग सर्कल में ऐसा विवाद भड़का हो।
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हाल ही में बिग बॉस कंटेस्टेंट और लोकल ब्लॉगर अनुराग डोभाल ने भी लाइव सुसाइड की कोशिश की थी, जो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही। अनुराग का मामला भी ब्लॉगर्स के बीच आपसी रंजिश और मानसिक तनाव से जुड़ा था। अब ज्योति की घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या उत्तराखंड के सोशल मीडिया ब्लॉगर्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ट्रोलिंग मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है?सोशल मीडिया के इस दौर में लाइव स्ट्रीमिंग ने कई बार ऐसी संवेदनशील स्थितियां पैदा की हैं। ज्योति का वीडियो देखने वाले हजारों यूजर्स ने कमेंट्स में पुलिस की तारीफ की, तो कुछ ने ब्लॉगर्स कम्युनिटी में जहर घोलने वालों को आड़े हाथों लिया। एक यूजर ने लिखा, यह ट्रोलिंग का दौर है, लेकिन जिंदगी से बड़ा कुछ नहीं। वहीं, कुछ ने ज्योति के आरोपों पर सवाल उठाए कि क्या यह सब पब्लिसिटी स्टंट है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ते विवाद मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में जहां ब्लॉगिंग लोकल न्यूज, संस्कृति और राजनीति पर फोकस करती है, वहां व्यक्तिगत हमले आम हो गए हैं। काउंसलर डॉ. रीता जोशी कहती हैं, “ऐसी धमकियां अक्सर दबी उदासी का नतीजा होती हैं। जरूरी है कि परिवार, दोस्त और पुलिस मिलकर ऐसे मामलों को संभालें।”पुलिस ने ज्योति के आरोपों को गंभीरता से लिया है। महिला ब्लॉगर के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से वीडियो की कॉपी मंगाई जा रही है। एसएसपी कार्यालय ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में लाइव सुसाइड धमकियों पर तुरंत मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए। यह घटना उत्तराखंड के सोशल मीडिया जगत के लिए सबक है। ब्लॉगर्स को आपस में एकजुट होकर ट्रोलिंग का मुकाबला करना होगा। ज्योति की रिकवरी की कामना के साथ, आशा है कि यह मामला जल्द सुलझेगा और कोई अनहोनी न हो। क्या यह विवाद ब्लॉगिंग की दुनिया में नई बहस छेड़ेगा? आने वाले दिनों में इसका असर साफ दिखेगा।
