देहरादून: आज रात उत्तराखंड का हर कोना एक अनोखे संकल्प से जगमगाएगा। प्रदेशभर में रात 8:30 से 9:30 बजे तक ‘अर्थ ऑवर’ मनाया जाएगा। इस दौरान सभी गैर-जरूरी लाइटें और विद्युत उपकरण बंद रहेंगे। उत्तराखंड शासन ने इस वैश्विक अभियान को अपनाते हुए लोगों से अपील की है कि वे एक घंटे के लिए बिजली बचाएं और पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाएं। यह कदम न केवल ऊर्जा संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर ग्रह सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम भी है।
वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) नई दिल्ली द्वारा आयोजित यह अभियान हर साल मार्च के आखिरी शनिवार को दुनिया भर में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2007 में सिडनी, ऑस्ट्रेलिया से हुई थी, जहां लाखों लोगों ने एक घंटे के लिए लाइटें बंद कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। आज यह अभियान 190 से अधिक देशों में फैल चुका है। भारत में भी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसी महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक यह पहुंच चुका है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में यह अभियान खास महत्व रखता है, जहां प्राकृतिक संसाधन पहले ही जलवायु परिवर्तन की चपेट में हैं।उत्तराखंड शासन ने प्रदेश के सभी जिलों में इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं।
देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर समेत सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। सरकारी भवनों, स्कूलों, कॉलेजों और स्ट्रीट लाइट्स को एक घंटे के लिए बंद करने के आदेश हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने व्यक्तिगत रूप से ट्वीट कर अपील की है, एक घंटे का अंधेरा, पर्यावरण को जीवनदान। आइए, हम सब मिलकर उत्तराखंड को हरा-भरा बनाएं। स्थानीय प्रशासन ने बाजारों, होटलों और आवासीय क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए हैं।यह अभियान केवल लाइटें बंद करने तक सीमित नहीं है।
इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जागरूकता फैलाना है। उत्तराखंड में ग्लेशियर पिघलने, भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। अर्थ ऑवर हमें याद दिलाता है कि छोटे-छोटे प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, पिछले साल दिल्ली में अर्थ ऑवर के दौरान 1.5 लाख मेगावाट बिजली की बचत हुई थी। उत्तराखंड में भी यदि हर घर 100 वाट की बचत करे, तो लाखों यूनिट बिजली बचेगी, जो पहाड़ी इलाकों में बिजली संकट को कम कर सकती है।पर्यावरणविदों का कहना है कि यह अभियान जीवनशैली बदलने का माध्यम है। WWF के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा खपत का 20% हिस्सा घरेलू उपकरणों से आता है। मोबाइल चार्जर, फैन, टीवी जैसे गैर-जरूरी उपकरण बंद रखने से कार्बन उत्सर्जन कम होता है।
उत्तराखंड के कुमाऊंनी और गढ़वाली संस्कृति में प्रकृति पूजा की परंपरा रही है। गंगा-यमुना की गोद में बसे इस राज्य में अर्थ ऑवर को अपनाना स्वाभाविक है। स्थानीय संगठन जैसे ‘हिमालयन एनवायरनमेंटल स्टडीज एंड कंजर्वेशन’ ने युवाओं को मोमबत्ती जलाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है।नागरिकों से अपील है कि वे रात 8:30 बजे लाइटें बंद कर मोमबत्ती या दीया जलाएं। परिवार के साथ बातचीत करें, प्रकृति की महत्ता पर चर्चा करें। सोशल मीडिया पर #EarthHourUK #SaveEnergyUK # हरा ऊत्तराखंड जैसे हैशटैग इस्तेमाल कर अभियान को वायरल करें। यह केवल एक घंटा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति स्थायी बदलाव का प्रारंभ है।उत्तराखंड शासन और WWF की यह पहल सराहनीय है। आइए, हम सब मिलकर इस ‘अंधेरे घंटे’ को रोशनी का संदेश बनाएं। कल सुबह एक स्वच्छ, हरे-भरे उत्तराखंड की ओर पहला कदम रखें। जय हिमालय! जय उत्तराखंड!
