हरिद्वार: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) ने बीते वर्ष पेपर लीक प्रकरण के बाद रद्द की गई स्नातक स्तरीय पदों की भर्ती परीक्षा की नई तिथि घोषित कर दी है। अब यह महत्वपूर्ण परीक्षा 17 मई 2026 को आयोजित होगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में तकनीकी पदों की भर्ती परीक्षा 3 मई को होगी। आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने इसकी आधिकारिक जानकारी दी है, जिससे प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। यह मामला 21 सितंबर 2025 का है, जब स्नातक स्तरीय पटवारी, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और अन्य पदों की लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान एक केंद्र पर नकल का गंभीर मामला सामने आया, जिसके बाद आयोग ने पूरी परीक्षा को निरस्त कर दिया। इस घटना ने उत्तराखंड के युवाओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। भर में छात्र-छात्राओं ने सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिए।
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खासकर देहरादून, हरिद्वार और अन्य जिलों में युवाओं ने आयोग और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इन प्रदर्शनों में छात्राओं की संख्या भी उल्लेखनीय थी, जिन्होंने सरकारी नौकरियों के सपनों पर पानी फेरने का आरोप लगाया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। उन्होंने स्वयं प्रदर्शनकारी छात्राओं के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनी और नकल प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी। सीएम धामी का यह कदम युवाओं के बीच सराहा गया, क्योंकि इससे आयोग पर परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ा। जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं, जिन्हें ठीक करने के लिए आयोग ने नई रूपरेखा तैयार की। अब स्नातक स्तरीय परीक्षा दोबारा 17 मई को होगी, जिसमें पटवारी, लेखपाल, VDO जैसे लोकप्रिय पद शामिल हैं। इन पदों पर हजारों रिक्तियां हैं, जो ग्रामीण विकास और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करेंगी।
दूसरी ओर, तकनीकी पदों की भर्ती परीक्षा 3 मई को निर्धारित की गई है। आयोग ने विभिन्न विभागों में 18 तरह के तकनीकी पदों के लिए परीक्षा का ऐलान किया है। इनमें जूनियर इंजीनियर, तकनीशियन, लैब असिस्टेंट जैसे पद शामिल हैं, जिनके लिए कुल 5872 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। खास बात यह है कि इन परीक्षाओं को टैब आधारित (CBT) तरीके से आयोजित किया जाएगा। इससे नकल की गुंजाइश कम होगी और प्रक्रिया तेज होगी। आयोग ने अभ्यर्थियों से एडमिट कार्ड और सिलेबस की वेबसाइट पर जांच करने को कहा है।यह फैसला उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं के लिए वरदान साबित होगा। पेपर लीक कांड ने न केवल आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र पर भरोसे को कमजोर किया। लेकिन नई तारीखों के साथ आयोग ने सुधार के संकेत दिए हैं।
अब अभ्यर्थियों को तैयारी में जुट जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि टैब आधारित परीक्षा से पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं रुकेंगी।उधर, राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को उठाया। विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि BJP ने सीएम धामी की सक्रियता की तारीफ की। युवा संगठनों ने मांग की है कि भविष्य की भर्तियों में सख्त निगरानी हो। कुल मिलाकर, 17 मई और 3 मई की तारीखें उत्तराखंड के रोजगार परिदृश्य को नया मोड़ देंगी। अभ्यर्थी अब किताबों में जुट जाएं, सफलता का इंतजार कर रही है!
