द्वाराहाट: पाली पछाऊं के ऐतिहासिक स्याल्दे बिखोती मेले का आयोजन 13 अप्रैल से होने जा रहा है। यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। नगर पंचायत सभागार में आयोजित हालिया बैठक में इसकी तैयारियों पर विस्तृत चर्चा हुई। नगर पंचायत अध्यक्ष संगीता आर्या की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मेले को भव्य रूप देने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सभी संबंधित विभागों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। मेले का शुभारंभ 13 अप्रैल को शाम चार बजे विभांडेश्वर मंदिर परिक्रमा के साथ होगा। यह परिक्रमा मेले की पारंपरिक शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भक्तिमय माहौल बनाएगी। 14 अप्रैल को द्वाराहाट में बटपुजै मेला आयोजित होगा, जो स्थानीय परंपराओं को जीवंत करेगा।
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मुख्य आकर्षण 15 अप्रैल को स्याल्दे मुख्य मेला होगा, जहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 16 अप्रैल को मीना बाजार के साथ सांस्कृतिक संध्या होगी, जिसमें झोड़ा, चांचरी, भगनौल, बैर जैसी पारंपरिक विधाओं का प्रदर्शन होगा। इन लोक नृत्यों और संगीत को बढ़ावा देने पर बैठक में विशेष बल दिया गया, ताकि कुमाऊंनी संस्कृति की अमूल्य विरासत संरक्षित रहे।बैठक में व्यावहारिक व्यवस्थाओं पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। बाहर से आने वाले व्यवसायियों को मेले स्थल पर पर्याप्त स्थान और सुरक्षा प्रदान करने का फैसला लिया गया। जल संस्थान को पेयजल की व्यवस्था, विद्युत विभाग को बिजली की आपूर्ति और नगर पंचायत को सफाई का दायित्व सौंपा गया। स्थानीय थोकदारों ने महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। आल, नौज्यूला, गरख धड़े के थोकदारों ने मेला स्थल तक पहुंचने वाले रास्तों से झूलते बिजली के तार हटाने और पेयजल की बेहतर व्यवस्था की मांग की। इन मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई, जिससे मेले की सुगमता सुनिश्चित होगी।
मेला कमेटी ने विगत वर्ष मेले में शिरकत करने वाले नगाड़े-निशान वाले गांवों को सम्मानित किया। इन गांवों को चेक वितरित कर उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया। यह कदम मेले की सामुदायिक भावना को मजबूत करेगा। बैठक में प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें विधायक मदन सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, एसडीएम सुनील कुमार राज, मेला कमेटी उपाध्यक्ष हेम रावत, नारायण रावत, डीपी चौधरी, गोविंद अधिकारी, नरेंद्र अधिकारी, गिरीश चौधरी, जगत रौतेला, रमेश आदि शामिल थे। इनकी उपस्थिति से तैयारियां और मजबूत हुईं।यह मेला न केवल धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला भी है। पर्यटक यहां खरीदारी, भक्ति और मनोरंजन का लुत्फ उठा सकेंगे। तैयारियों से उत्साह चरम पर है, और सभी उम्मीद कर रहे हैं कि यह मेला यादगार बनेगा। पाली पछाऊं प्रशासन और समुदाय की संयुक्त प्रयासों से स्याल्दे बिखोती मेला अपनी ऐतिहासिक गरिमा को और निखारेगा।
