चमोली: उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका प्रियंका मेहर हाल ही में अपने नए गीत “स्वामी जी प्लीज” को लेकर विवादों में आ गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के कुछ हिस्सों को लेकर लोगों का कहना है कि इस गीत में एक लाइन “उर्गम के कस्से में दगड़ियों के साथ फुल नशे में” धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। विशेष रूप से उर्गम घाटी क्षेत्र के लोगों ने इसे अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। इसका सबसे पहला विरोध जोशीमठ ब्लॉक प्रमुख अनूप सिंह नेगी ने किया, जिनका कहना है कि प्रियंका मेहर जैसी चर्चित कलाकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। उनका कथन था कि उर्गम घाटी धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान है, जहाँ भगवान कल्याणिका और अन्य कई देवस्थलों का वास है। ऐसे में इस घाटी को “नकारात्मक रूप में” प्रस्तुत किया जाना बेहद निराशाजनक है। उनका आरोप है कि इस पंक्ति के माध्यम से समाज के युवाओं और क्षेत्र की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई है।
हालांकि, इस विवाद के बढ़ने के बाद गायिका प्रियंका मेहर ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए बयान जारी किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “न मैंने यह गीत लिखा है और न ही वह विवादित लाइन मैंने गाई है।” प्रियंका का कहना है कि बिना तथ्य जांचे उनके नाम को विवाद में घसीटा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर उनकी निजी जानकारी साझा की जा रही है, जिससे उनके परिवार और निजी जीवन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।प्रियंका मेहर उत्तराखंड की उन लोक कलाकारों में से हैं जिन्होंने अपनी मधुर आवाज़ और आधुनिक प्रस्तुतिकरण के माध्यम से पहाड़ी संगीत को देश-विदेश में नई पहचान दिलाई है। परंपरागत गीतों के साथ आधुनिक संगीत के मेल से वह पहाड़ी युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। ऐसे में यह विवाद स्थानीय समाज ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के संगीत जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।कई लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रियंका के समर्थन में भी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि कलाकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, और किसी गीत के एक हिस्से से पूरे व्यक्ति के चरित्र या इरादे का मूल्यांकन नहीं किया जाना चाहिए।
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कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि किसी भी प्रकार के सामाजिक या धार्मिक विवाद को परिपक्वता के साथ सुलझाना चाहिए, न कि ट्रोलिंग और व्यक्तिगत हमलों के माध्यम से।दूसरी ओर, उर्गम घाटी के लोगों का कहना है कि उनका मकसद विवाद खड़ा करना नहीं बल्कि अपनी भावनाओं को सम्मानपूर्वक व्यक्त करना है। उनका कहना है कि उर्गम जैसे पवित्र स्थल की पहचान देवभूमि के सम्मान से जुड़ी है और इसकी गरिमा का संरक्षण सभी की जिम्मेदारी होनी चाहिए।यह पूरा प्रकरण यह दिखाता है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी बात का प्रसार किस तेजी से होता है और कैसे अपुष्ट जानकारियाँ एक बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं।
कलाकारों को जहाँ अपनी अभिव्यक्ति की सीमा का ध्यान रखना चाहिए, वहीं समाज को भी संतुलन और सहिष्णुता के साथ प्रतिक्रिया देनी चाहिए।प्रियंका मेहर ने अपने स्टेटमेंट के अंत में कहा कि वह इस विषय पर निष्पक्ष जांच की उम्मीद रखती हैं और चाहती हैं कि सच सामने आए ताकि उनकी छवि को जो नुकसान पहुँचाया गया है, उसकी भरपाई हो सके।वर्तमान में यह मामला उत्तराखंड के संगीत समुदाय और सामाजिक चर्चा, दोनों का केंद्र बन गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आपसी संवाद और समझ के जरिये सुलझता है या आगे और गहराता है।
