मदर टेरेसा (Mother Teresa), जिन्हें संत टेरेसा ऑफ़ कलकत्ता (Saint Teresa of Calcutta) के नाम से भी जाना जाता है, जो मानवता की सेवा का प्रतीक मानी जाती हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, बीमारों, अनाथों और बेसहारा लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया।
मदर टेरेसा का मूल नाम एग्नेस गोंझा बोयाजियू (Agnes Gonxha Bojaxhiu) था। जिनका जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे (अब उत्तर मैसेडोनिया) में हुआ था । वह रोमन कैथोलिक धर्म को मनाने वाली थी। प्रारंभ में युगोस्लाविया की नागरिक थी उसके बाद उन्होंने भारत की नागरिकता (1948) ले ली थी। मदर टेरेसा का जन्म एक अल्बानियाई परिवार में हुआ था। 18 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना जीवन धार्मिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया और 1929 में भारत आईं।
मदर टेरेसा का भारत में आगमन
मदर टेरेसा सन् 1929 में कलकत्ता (अब कोलकाता) आईं। उन्होंने 17 वर्षों तक शिक्षिका के रूप में लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल में कार्य किया। 7 अक्टूबर 1950 को कोलकाता में मिशनरी ऑफ चैरिटी की स्थापना की। जिसका उद्देश्य गरीबों, रोगियों, बेसहारों, कुष्ठ रोगियों, अनाथ बच्चों और बेघर लोगों की सेवा करना था। जब उन्होंने इसे शुरू किया था, तब केवल 12 नन थीं। आज मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी के विश्वभर में 130 से अधिक देशों में 4,500 से अधिक सदस्य कार्यरत हैं। उन्होंने कोलकाता की झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर मरीजों की देखभाल का काम किया। कुष्ठ रोगियों, टीबी मरीजों और बेघर लोगों के लिए निशुल्क अस्पताल व होम का निर्माण किया। मदर टेरेसा ने ‘निर्मल हृदय’ और ‘निर्मला शिशु भवन’ जैसी संस्थाओं की स्थापना की। उन्होंने बिना किसी धर्म, जाति या भाषा के भेदभाव के मानवता की सेवा की।
पुरस्कार एवं सम्मान
मदर टेरेसा को उनके अद्वितीय सेवा कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान मिले:
वर्ष | पुरस्कार / सम्मान |
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1962 | पद्मश्री (भारत सरकार) |
1971 | पोप जॉन XXIII पीस प्राइज |
1979 | नोबेल शांति पुरस्कार |
1980 | भारत रत्न |
1983 | ब्रिटिश ऑर्डर ऑफ मेरिट |
1997 | अमेरिकी कांग्रेसनल गोल्ड मेडल |
2016 | वेटिकन सिटी द्वारा संत की उपाधि |
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मदर टेरेसा के जीवन से जुड़े कई प्रेरणादायक किस्से हैं, जो उनके निःस्वार्थ सेवा भाव, दयालु हृदय और मानवता के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं।
“किस्सा है मरते हुए व्यक्ति को गोद में उठाना”
एक बार मदर टेरेसा को कोलकाता की एक सड़क किनारे एक व्यक्ति मिला, जो बहुत बीमार था और लोग उसके पास से नाक पर रूमाल रखकर निकल रहे थे। मदर टेरेसा तुरंत उसके पास गईं, उसे अपनी गोद में उठाया और निर्मल हृदय (Nirmal Hriday) होम में ले आईं। वहाँ उन्होंने उसका इलाज करवाया, उसे खाना खिलाया और आराम दिया।
जब लोगों ने उनसे पूछा —
“मदर, आप इतनी गंदगी और बदबू के बीच जाकर उसकी सेवा कैसे कर लेती हैं?”
मदर टेरेसा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया:
"हर पीड़ित व्यक्ति में मुझे यीशु का चेहरा दिखता है। जब मैं उनकी सेवा करती हूँ, तो मानो यीशु की सेवा कर रही हूँ।"
धर्म का वास्तविक अर्थ हम मदर टेरेसा के कामों से समझ पाते हैं। हम भले ही कई धर्मों में बंटे हो, लेकिन हमें ये समझ लेना होगा कि धर्म का अर्थ क्या है। जब तक हम धर्म का वास्तविक अर्थ अपने जीवन कार्यों में नहीं उतार लेते तब तक हमें धार्मिक कहलाने का कोई अधिकार नहीं है।
दूसरी कहानी जुड़ी है नोबेल पुरस्कार की रकम दान करने से। सन् 1979 में मदर टेरेसा को नोबेल शांति पुरस्कार मिला। इस पुरस्कार के साथ उन्हें 1,92,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि दी गई। कई लोग सोचते थे कि वह इस धनराशि से मिशनरीज ऑफ चैरिटी का विस्तार करेंगी, लेकिन मदर टेरेसा ने पूरा पैसा गरीबों, अनाथों और कुष्ठ रोगियों की सेवा में दान कर दिया।
उनका कहना था:
"मेरे पास पैसे रखने की आदत नहीं है। गरीबों का हक गरीबों को ही लौटना चाहिए।"
ऐसी कई कहानियाँ हैं जो मदर टेरेसा के महान जीवन को दर्शाती हैं, इसी अनुक्रम में एक कहानी है बेटी को गोद लेने से जुड़ी हुई।
‘मैं तुम्हें नहीं चाहती’ वाली बच्ची
एक बार मदर टेरेसा के पास एक महिला आई, जो अपनी नवजात बच्ची को अनाथालय में छोड़ना चाहती थी। जब मदर टेरेसा ने कारण पूछा, तो महिला ने कहा:
“मेरे पति को बेटा चाहिए था, बेटी नहीं।”
मदर टेरेसा ने उस बच्ची को गोद में लिया, प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरा और कहा:
"अगर तुम उसे नहीं चाहती हो, तो मुझे दे दो। मैं उसे चाहूँगी, पालूँगी और पढ़ाऊँगी।"
यह घटना उनके निःस्वार्थ प्रेम और मानवता के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
मदर टेरेसा का निधन
मदर टेरेसा (Mother Teresa) का निधन 5 सितंबर 1997 को कोलकाता में हुआ। उनके निधन के बाद पूरी दुनिया ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसलिए 5 सितंबर को हर साल “मदर टेरेसा स्मृति दिवस” के रूप में मनाया जाता है। मदर टेरेसा जैसी शख्सियत का समाज में होना किसी fantasy वर्ल्ड से कम नहीं लगता। आज भी कई लोगों की रोल मॉडल हैं मदर टेरेसा, जो उन्हें समाज के लिए निःस्वार्थ प्रेमऔर मानवता के प्रति समर्पित होने की सीख देती हैं।