नई दिल्ली: लोकसभा में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध को देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती करार दिया। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि हमें कोरोना महामारी जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा। पीएम का यह बयान आते ही सोशल मीडिया और गूगल पर हंगामा मच गया। लाखों लोग ‘लॉकडाउन इन इंडिया’ सर्च करने लगे। क्या वाकई भारत में कोरोना जैसे हालात लौट आए हैं? आइए, पीएम मोदी के बयान के मायने समझें और जानें कि भारत ने तेल-गैस संकट से निपटने के लिए क्या तैयारी की है। पीएम मोदी ने साफ कहा कि देश में कोई पैनिक नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि पश्चिम एशिया का युद्ध भारत को कैसे प्रभावित कर रहा है? खाड़ी क्षेत्र से भारत की 50 फीसदी से ज्यादा तेल-गैस आपूर्ति होती है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। अब यह सप्लाई बाधित हो गई है। नतीजा? कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। इंडस्ट्रीयल गैस सप्लाई में कटौती हो गई है, जबकि घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाया जा रहा है। लेकिन चिंता मत कीजिए, भारत ने पहले से ही वैकल्पिक प्लान तैयार कर लिया है।
पड़ोसी देशों के इमरजेंसी उपाय: भारत भी सीख रहा सबक
दुनिया भर में तेल संकट से जूझ रहे देश इमरजेंसी कदम उठा रहे हैं। भारत के सुदूर पड़ोसी फिलीपींस में सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम का नियम लागू हो गया है। गैर-जरूरी यात्राओं पर पाबंदी लगाई गई और एनर्जी सेविंग प्रोटोकॉल्स अपनाने की सलाह दी जा रही है। फिलीपींस तेल आपूर्तिकर्ताओं के विकल्प तलाश रहा है और रिजर्व स्टॉक बढ़ाने पर जोर दे रहा है। वहां अभी 45 दिनों का ईंधन रिजर्व उपलब्ध है।पाकिस्तान और श्रीलंका में हालात और भी गंभीर हैं। श्रीलंका ने कुछ सेक्टर्स में सार्वजनिक छुट्टियों को अनिवार्य कर दिया। बांग्लादेश ने ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा दिया, जबकि निश्चित समय के लिए बिजली कटौती शुरू हो गई। पाकिस्तान ने हफ्ते के काम के घंटों में कटौती की। वियतनाम में कारोबारियों को घर बैठे काम करने की सलाह दी जा रही है। ये सभी देश ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं, और भारत इनसे सबक ले रहा है।
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भारत की मजबूत तैयारी: 41 देशों से तेल, 53 लाख टन रिजर्व
पीएम मोदी ने लोकसभा में बताया कि भारत पहले 27 देशों से तेल-गैस आयात करता था, जो अब बढ़कर 41 हो गया है। खाड़ी के अलावा रूस, अमेरिका और अन्य देशों से सप्लाई बढ़ाई जा रही है। देश के पास अभी 53 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है, और अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन के रिजर्व पर काम चल रहा है। पिछले 11 सालों में भारत ने रिफाइनिंग क्षमता में भारी बढ़ोतरी की है। अभी 45 दिनों का ईंधन स्टॉक मौजूद है, जो संकट में देश को सहारा देगा।सरकार ने इंडस्ट्रीयल सेक्टर में गैस सप्लाई कम कर घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी। एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाकर सिलेंडर की कमी को दूर करने की कोशिश हो रही है। साथ ही, काला बाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। पीएम ने भरोसा दिलाया कि पैनिक फैलाने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
क्या भारत में लगेगा लॉकडाउन? नो, लेकिन ये उपाय अपनाएं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में फिलहाल लॉकडाउन जैसे हालात नहीं हैं। कोरोना महामारी स्वास्थ्य संकट था, जबकि यह ऊर्जा संकट है। युद्ध लंबा खिंचता है तो हालात गंभीर हो सकते हैं, लेकिन कोरोना जैसा पूर्ण लॉकडाउन नहीं लगेगा। इसके बजाय पड़ोसी देशों जैसे स्मार्ट उपाय अपनाए जाएंगे।
संभावित इमरजेंसी उपाय
- वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा: सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में घर से काम का चलन बढ़ेगा, जैसे बांग्लादेश में हुआ।
- इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर: पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए EV को प्रोत्साहन, चार्जिंग स्टेशन बढ़ाए जाएंगे।
- सोलर एनर्जी और इंडक्शन चूल्हे: घरों में सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक कुकिंग को सब्सिडी, गैस पर निर्भरता कम होगी।
- एनर्जी सेविंग प्रोटोकॉल: हफ्ते में काम के दिन कम करना, बिजली कटौती और गैर-जरूरी ट्रैवल पर रोक।
- काला बाजारी पर सख्ती: स्टॉकिंग और ओवरप्राइसिंग करने वालों पर तुरंत कार्रवाई।
ये कदम अपनाने से भारत न सिर्फ संकट से निपटेगा, बल्कि लंबे समय में ऊर्जा आत्मनिर्भर बनेगा। पीएम मोदी की अपील सही मायने में दूरदर्शी है – तैयार रहो, लेकिन घबराओ मत।पश्चिम एशिया युद्ध का असर वैश्विक है, लेकिन भारत की तैयारी मजबूत है। अगर आप अपने इलाके में ईंधन या गैस की कमी महसूस कर रहे हैं, तो ऊपर बताए उपाय अपनाएं। सरकार हर कदम पर नजर रखे हुए
