रुद्रप्रयाग: हर वर्ष की तरह इस बार भी महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित की जाएगी। यह परंपरा उत्तराखंड के धार्मिक जगत में सदियों पुरानी है, जो भगवान शिव के भक्तों के लिए उत्साह का संचार करती है। उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में आयोजित पंचांग गणना के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पदाधिकारी एवं तीर्थ पुरोहित मिलकर शुभ मुहूर्त का निर्धारण करते हैं। इस वर्ष भी फरवरी के प्रथम पखवाड़े में होने वाली इस घोषणा से लाखों श्रद्धालु उत्साहित हैं। पिछले वर्ष कपाट 28 अप्रैल को खुले थे, और इस बार भी यात्रा मार्ग पर भारी संख्या में तीर्थयात्री पहुंचने की उम्मीद है।
केदारनाथ धाम, जो चार धामों में से एक है, हिमालय की गोद में बसा यह तीर्थस्थल भगवान शिव का 12 ज्योतिर्लिंग है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण नवंबर में कपाट बंद हो जाते हैं, और बसंत में महाशिवरात्रि पर ही इन्हें खोला जाता है। इस परंपरा का निर्धारण ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होता है। उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में पंचांगकार पंडित वर्षा ऋतु, नक्षत्र, तिथि और अन्य शुभ योगों का अध्ययन करते हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय एवं अन्य सदस्यों के साथ तीर्थ पुरोहित इस निर्णय में भाग लेते हैं। घोषणा होते ही धाम की ओर प्रस्थान का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस वर्ष 2026 में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे भक्तों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
आगामी चार धाम यात्रा को सफल बनाने के लिए रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी प्रतीक जैन के नेतृत्व में विभिन्न विभागों की टीमें सक्रिय हैं। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107) से जुड़ी समस्याओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। वर्षा एवं भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़कों का मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। सोनप्रयाग, फाटा, रामपुर जैसे प्रभावित स्थलों पर मलबा हटाने, ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करने और चौड़ीकरण का काम जोरों पर है। डीएम प्रतीक जैन ने बताया, “यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर हमने घोड़ा-खच्चर, डंडी-कंडी संचालकों, मंदिर समिति, होटल व्यवसायियों, जनप्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों से विस्तृत संवाद किया है। सभी पक्षों से सकारात्मक सहयोग मिला है।”प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, यातायात और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है। सोनप्रयाग से केदारनाथ पैदल मार्ग पर 16 किमी की दूरी को सुरक्षित बनाने के लिए घोड़े-खच्चर पथ का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है।
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डंडी-कंडी संचालकों को प्रशिक्षण दिया गया है ताकि बुजुर्ग और अस्वस्थ यात्री सुरक्षित पहुंच सकें। मंदिर समिति ने हेली सेवा, रजिस्ट्रेशन पोर्टल और ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था पहले से सुचारू कर दी है। होटल व्यवसायियों से स्वच्छता और अतिथि सत्कार के मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय संसाधनों का उपयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया है। व्यापारिक संगठनों ने आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का वचन दिया है।पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी प्रशासन सजग है। प्लास्टिक मुक्त यात्रा अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं को जागरूक किया जा रहा है। वन विभाग ने मार्ग पर वृक्षारोपण अभियान तेज किया है। स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस और ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात रहेंगी। डीएम ने कहा, “हमारा लक्ष्य शून्य दुर्घटना वाला यात्री वर्ष बनाना है। पिछले वर्ष 15 लाख से अधिक यात्री आए थे, इस बार भी संख्या अधिक रहने का अनुमान है।
उत्तराखंड सरकार ने यात्रा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय से सहयोग मांगा है। हरिद्वार, ऋषिकेश से विशेष ट्रेनें और हेलीकॉप्टर सेवाएं बढ़ाई जा रही हैं। स्थानीय विधायक एवं सांसदों ने बजट आवंटन में योगदान दिया है। भक्तों की सुविधा के लिए आरआरटी (रुद्रप्रयाग रेस्क्यू टीम) को सतर्क रहने के निर्देश हैं। इस प्रकार, केदारनाथ यात्रा अब पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित हो रही है।महाशिवरात्रि की घोषणा से उत्तराखंड में भक्ति का माहौल बन गया है। कुमाऊं और गढ़वाल के मंदिरों में विशेष पूजाएं हो रही हैं। केदारनाथ धाम भक्तों का इंतजार कर रहा है। प्रशासन की इन तैयारियों से यात्रा निर्विघ्न संपन्न होने की पूरी संभावना है। जय भोलेनाथ!