हल्द्वानी: उत्तराखंड के पत्रकारिता जगत में गम और आक्रोश की लहर उस समय गहरी हो गई जब उत्तरकाशी के डिजिटल मीडिया के पत्रकार राजीव प्रताप की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई। राजीव प्रताप न सिर्फ एक तेजतर्रार पत्रकार के रूप में जाने जाते थे, बल्कि सामाजिक मुद्दों को उठाने में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। उनकी असमय और रहस्यमयी मौत ने पूरे प्रदेश के पत्रकार समुदाय को हिला कर रख दिया है।
सोमवार को हल्द्वानी के पत्रकारों ने इस मामले में न्याय की मांग करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों का कहना था कि राजीव की मौत एक सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती, क्योंकि वे लगातार जनसरोकार से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे और कई बार सत्ता-पक्ष को असहज करने वाले तथ्य उजागर कर चुके थे। इसलिए उनकी मौत को पत्रकारों ने संदिग्ध मानते हुए जांच की मांग की।
पत्रकारों का आक्रोश और मांग
हल्द्वानी प्रेस क्लब से जुड़े पत्रकारों ने कहा कि यह घटना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम जनता की आवाज़ दब जाएगी। ज्ञापन में पत्रकारों ने मांग की कि राज्य सरकार मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए, दोषियों की पहचान हो और राजीव प्रताप को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही, पत्रकारों ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष नीति बनाए जाने की अपील भी की। उनका कहना था कि लगातार प्रदेश भर में काम करने वाले पत्रकार दबाव, धमकी और असुरक्षा की स्थितियों में काम कर रहे हैं, जिसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपे गए ज्ञापन में पत्रकारों ने साफ तौर पर लिखा कि राजीव प्रताप की मौत केवल एक व्यक्तिगत या पारिवारिक घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की विफलता को उजागर करती है। पत्रकारों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार तेजी से कार्रवाई नहीं करती, तो पूरे प्रदेश के पत्रकार आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
सिटी मजिस्ट्रेट ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि ज्ञापन को तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे गम्भीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार एवं प्रशासन पत्रकारों की सुरक्षा और न्याय के लिए प्रतिबद्ध है।
पत्रकारिता पर बढ़ते खतरे
राजीव प्रताप की संदिग्ध मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रदेश में पत्रकारिता करना सुरक्षित है? जिन पत्रकारों पर समाज की आवाज़ बुलंद करने की जिम्मेदारी है, वही कब अपनी जान जोखिम में डाल बैठें, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकार अक्सर न तो पर्याप्त सुरक्षा पाते हैं और न ही उनके पास दबावों का सामना करने के लिए कोई सशक्त मंच होता है। पत्रकार संगठनों का मानना है कि राजीव प्रताप जैसी घटनाएं अकेली नहीं हैं। अतीत में भी कई पत्रकार हमलों और धमकियों का शिकार हो चुके हैं। ऐसे में व्यापक स्तर पर नीतिगत सुधार और सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता है।
भावभीनी श्रद्धांजलि
हल्द्वानी के पत्रकारों ने ज्ञापन सौंपने से पहले राजीव प्रताप को भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी। इस दौरान पत्रकार समुदाय की आंखें नम थीं और एक ही स्वर था – “हम राजीव को न्याय दिलाएंगे”। पत्रकारों ने कहा कि राजीव प्रताप की मौत को भुलाया नहीं जाएगा और इसे केवल एक आंकड़े के रूप में दर्ज नहीं होने दिया जाएगा। वे चाहते हैं कि प्रदेश का हर पत्रकार इस दुख की घड़ी में एकजुट होकर आगे आए, क्योंकि यह लड़ाई केवल राजीव प्रताप की नहीं बल्कि पूरे पत्रकार समाज की है
