नई दिल्ली: ईरान-इस्राइल युद्ध की तपिश अब भारतीय घरों की रसोई तक पहुंच चुकी है। घरेलू एलपीजी उपभोक्ता दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर सिलेंडर के दामों में भारी उछाल आया है, वहीं दूसरी ओर रिफिल बुकिंग का अंतराल 15 से बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया। शनिवार सुबह दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में उपभोक्ताओं ने बुकिंग के लिए फोन घुमा-घुमाए, लेकिन सर्वर ने ‘बुकिंग स्वीकार नहीं’ का संदेश देकर निराश किया। बाद में खुलासा हुआ कि घरेलू 14.2 किलो का सिलेंडर अब 925.50 रुपये और 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 1923.50 रुपये का हो गया। होली जैसे त्योहार के बाद यह झटका उपभोक्ताओं के लिए पानी पी-पीकर कोसने जैसा है। इस मूल्यवृद्धि का सीधा संबंध वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव से है।
ईरान-इस्राइल संघर्ष ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दामों को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें 10-15 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। भारत, जो 50 प्रतिशत से अधिक एलपीजी आयात करता है, इसकी चपेट में आना स्वाभाविक था। तेल विपणन कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर घरेलू सिलेंडर में 60 रुपये और कमर्शियल में 113.50 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की। दिल्ली जैसे महानगरों में जहां पहले ही महंगाई का बोझ है, यह वृद्धि मासिक खर्च को 10-15 प्रतिशत बढ़ा देगी। एक औसत परिवार, जो महीने में दो सिलेंडर इस्तेमाल करता है, अब अतिरिक्त 120 रुपये का खर्चा उठाएगा।
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होली के त्योहारी मौसम ने स्थिति को और जटिल बना दिया। गुज्जू-भंगड़ा, होलिका दहन और पारंपरिक व्यंजनों ने गैस की खपत दोगुनी कर दी। त्योहार बीतते ही लाखों सिलेंडर खाली हो गए। उपभोक्ता भक्त सिंह (नाम बदला गया) बताते हैं, “शनिवार सुबह 10 बजे से फोन लगाए, लेकिन ‘अभी बुकिंग उपलब्ध नहीं’ का मैसेज आता रहा। पता चला कि अब 21 दिन का इंतजार!” इंडियन ऑयल के अनुसार, यह बदलाव स्टॉक प्रबंधन और सप्लाई चेन दबाव के कारण है। पहले 15 दिन का गैप था, अब 21 दिन हो गया। इससे छोटे परिवारों को सब्सिडी वाले सिलेंडर का इंतजार लंबा हो गया है। उज्ज्वला योजना की लाखों महिलाएं, जो PMUY के तहत सिलेंडर लेती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ग्रामीण इलाकों में जहां वैकल्पिक ईंधन सीमित हैं, यह समस्या गंभीर है।सरकार की ओर से अभी कोई राहत पैकेज की घोषणा नहीं हुई। विपक्ष ने संसद में इसे उठाने की चेतावनी दी है। अर्थशास्त्री डॉ. अजय शाह का कहना है,
युद्ध समाप्ति तक दाम स्थिर नहीं होंगे। उपभोक्ताओं को ऊर्जा संरक्षण अपनाना होगा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं: गैस बचाने के लिए प्रेशर कुकर का अधिक उपयोग करें, लिकेज चेक करें और कम फ्लेम पर पकाएं। कुछ लोग इंडक्शन कुकटॉप या सोलर कुकर की ओर रुख कर रहे हैं।यह मूल्यवृद्धि महंगाई की होली साबित हो रही है। उपभोक्ता संगठन फेडकॉन ने तत्काल रिफिल गैप कम करने और सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है। क्या सरकार सुनेंगी? फिलहाल, रसोई की आग बुझने का डर लाखों घरों में है। वैश्विक शांति ही एकमात्र समाधान लगता है, वरना अगला झटका और बड़ा होगा।
