पौड़ी: उत्तराखंड की धरती हमेशा से प्रतिभाओं से भरी रही है। यहां के छोटे-से गांवों से निकलकर कई युवा अपने सपनों को नई उड़ान दे चुके हैं। आज हम बात कर रहे हैं पौड़ी गढ़वाल जिले के पोखड़ा ब्लॉक के गिंवाली गांव की बेटी सानिया राणा की, जिसने न केवल अपने जीवन में सफलता पाई बल्कि अपने पिता के सपनों को भी साकार किया। सानिया की मेहनत और संघर्ष की कहानी अनगिनत बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो समाज की बाधाओं से लड़कर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।
बचपन से ही बोया सपनों का बीज
सानिया राणा का बचपन गिंवाली गांव की संकरी गलियों और पहाड़ी वातावरण में बीता। उनके पिता का सपना था कि बेटी पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बने। गांव में पढ़ाई-लिखाई जितनी आसानी से उपलब्ध नहीं थी, उतनी ही मजबूत थी सानिया की लगन। पिता ने हमेशा उन्हें प्रेरित किया कि बेटियों का जीवन केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वे भी बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं। सानिया बचपन से ही पढ़ाई में होनहार रहीं। उन्होंने न केवल स्कूल में अच्छे अंक प्राप्त किए।
संघर्ष और मेहनत
गांव की सीमित सुविधाओं के बावजूद सानिया ने हार नहीं मानी। रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना, शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मेहनत करना – यह सब उनके सफर का हिस्सा रहा। आर्थिक स्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन परिवार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी। इस दौरान कई लोगों ने सवाल उठाए कि एक लड़की को इतनी मेहनत करवाने का क्या फायदा, लेकिन सानिया और उनके पिता ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने साबित किया कि सपनों को साकार करने के लिए हिम्मत और धैर्य सबसे बड़े हथियार हैं।
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पिता का सपना हुआ साकार
सानिया जब छोटी थीं तब उनके पिता अक्सर गाड़ियों को देखकर कहा करते थे—“मेरी बेटी एक दिन गाड़ी जरूर चलाएगी।” उस जमाने में पहाड़ की लड़कियों का गाड़ी चलाना एक सपने जैसा था। गांव की संकरी पगडंडियों और सीमित साधनों के बीच बेटियों को अक्सर छोटी सोच में बांध दिया जाता था।
लेकिन सानिया के पिता का मानना था कि लाड़ली केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित न रहे बल्कि जीवन की हर राह पर आत्मनिर्भर बने। आखिरकार कड़ी मेहनत और निरंतर संघर्ष के बाद सानिया ने अपने पिता का सपना पूरा कर दिखाया। उन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की – चाहे वह नौकरी में सफलता हो, शिक्षा की ऊंचाइयों तक पहुंचना हो या किसी प्रतियोगिता में नाम रोशन करना।
आज सानिया न केवल गांव की, बल्कि पूरे जिले की मिसाल बन चुकी हैं। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया कि बेटियां भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। सानिया का कहना है, “मेरे पापा का विश्वास ही मेरी ताकत रही। उन्होंने मुझे सपने दिए और मैंने उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत की।”
लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा
सानिया राणा की कहानी आज हजारों-लाखों बेटियों के लिए मार्गदर्शन का काम कर रही है। जिन परिवारों में बेटियों को आगे पढ़ाने पर संकोच किया जाता है, वहां सानिया जैसे उदाहरण दिलों में उम्मीद जगाते हैं। गिंवाली गांव की यह बेटी बताती है कि अगर घर का समर्थन और खुद की मेहनत हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता। उनकी सफलता खासतौर पर पहाड़ की बेटियों के लिए प्रेरणा है, जिन्हें अक्सर सुविधाओं और अवसरों की कमी का सामना करना पड़ता है। सानिया ने साबित किया कि आत्मविश्वास और लगन से हर मंजिल पाई जा सकती है।
