महाराष्ट्र: सातारा जिले में दोहरी त्रासदी ने पूरे इलाके को शोक की लहर में डुबो दिया है। सातारा तालुका के अरेदरे गांव के सैनिक प्रमोद परशुराम जाधव अपनी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी के लिए घर लौटे थे, लेकिन सड़क हादसे में उनकी जान चली गई। दूसरी ओर, फलटण तालुका के बरड गांव के विकास विठ्ठलराव गावड़े दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति मिशन पर तैनात थे, जहां वे शहीद हो गए। इन घटनाओं ने सातारा जिले के हर कोने में मातम पसर गया है।प्रमोद जाधव की शादी को महज एक साल ही हुआ था। वे भारतीय सेना में सेवा दे रहे थे और अपनी ड्यूटी से 8 दिनों की छुट्टी लेकर सातारा लौटे थे। उनकी पत्नी को डिलीवरी के लिए सातारा के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे प्रमोद वाढे फाटा से सातारा की ओर मोटरसाइकिल पर आ रहे थे। पुराने आरटीओ ऑफिस चौक के पास उनकी बाइक की जबरदस्त टक्कर एक पिकअप ट्रक से हो गई।
हादसे के दौरान प्रमोद सड़क पर गिर पड़े और उनके सिर को गंभीर चोट लग गई। मौके पर ही उनकी सांसें थम गईं। स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत सातारा के अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सबसे हृदयविदारक पहलू यह रहा कि उसी रात प्रमोद की मौत हुई और शनिवार, 10 जनवरी को सुबह उनकी पत्नी ने एक स्वस्थ नन्ही बच्ची को जन्म दिया। बाप-बेटी का यह मिलन कभी न हो सका। प्रमोद अपनी बेटी का चेहरा तक न देख सके।अरेदरे गांव में सुबह होते ही शोक की खबर फैल गई। पूरा गांव मातम में डूब गया। प्रमोद के परिवार में माता-पिता, भाई-बहन और अब विधवा पत्नी व नवजात बेटी हैं। गांववालों ने बताया कि प्रमोद एक मेहनती, अनुशासित और परिवार के प्रति समर्पित सैनिक थे। वे हमेशा गांव की युवाओं को सेना जॉइन करने के लिए प्रेरित करते थे। उनकी मौत ने न सिर्फ परिवार को तोड़ा, बल्कि पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया।स्थानीय पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पिकअप ट्रक तेज गति से आ रहा था और चालक ने ब्रेक नहीं लगाया। ट्रक चालक को हिरासत में ले लिया गया है।
सातारा पुलिस ने कहा कि मामला IPC की धारा 304A (लापरवाही से मौत) के तहत दर्ज किया गया है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वाढे फाटा से आरटीओ चौक तक का रास्ता अंधेरा और संकरी सड़कों वाला है, जहां हादसे आम हैं। स्थानीय प्रशासन को सड़क लाइटिंग और साइनेज सुधारने की मांग तेज हो गई है।दूसरी दुखद घटना फलटण तालुका के बरड गांव से जुड़ी है। विकास विठ्ठलराव गावड़े UN के शांति मिशन पर दक्षिण सूडान तैनात थे। वहां चल रही हिंसा में वे शहीद हो गए। विकास भी एक युवा सैनिक थे, जो देश की सेवा में समर्पित थे। उनके शहीद होने की खबर मिलते ही बरड गांव में सन्नाटा छा गया। परिवार और ग्रामीणों ने शोक सभा आयोजित की। सातारा जिला प्रशासन ने दोनों शहीदों के परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।सातारा जिले में सैनिकों की यह कुर्बानी स्थानीय लोगों के लिए गर्व और दर्द का विषय बनी हुई है।
प्रमोद की बेटी अब अनाथ है, लेकिन गांव ने फैसला किया है कि पूरा समुदाय उसका परिवार बनेगा। विकास की शहादत ने UN मिशन की कठिनाइयों को उजागर किया है। जिले के लोग सोशल मीडिया पर #सातारा_शहीद, #जाधव_गावडे_अमर_रहें जैसे हैशटैग ट्रेंड करा रहे हैं।इन घटनाओं ने सड़क सुरक्षा और सैनिक कल्याण पर बहस छेड़ दी है। सरकार से मांग हो रही है कि सैनिकों की छुट्टियों के दौरान बेहतर सुरक्षा व्यवस्था हो और विदेशी मिशनों पर बीमा-अन्य सुविधाएं मजबूत हों। सातारा जिला शहीदों को सलाम करता है। उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।
