नई दिल्ली: डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग के काम में लगे करीब 1 लाख लोगों को अपना रोजगार खोना पड़ा है अमेरिकी टैरिफ वृद्धि के कारण हीरा कटाई और पॉलिशिंग उद्योग गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो कुछ ही महीनों में 10% से बढ़कर 50% हो गई है।
इस स्थिति के कारण गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में लगभग 1,00,000 नौकरियाँ चली गई हैं, जिसका असर विशेष रूप से छोटी इकाइयों पर पड़ रहा है। अमेरिकी ग्राहकों द्वारा ऑर्डर रद्द करने के कारण, जो कर्मचारी पहले ₹15,000-₹20,000 मासिक कमाते थे, उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है।
ऑर्डर नहीं ले रहे व्यापारी
सूरत के बड़ी हीरा कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों से क्रिसमस के लिए मिलने वाले ऑर्डर नहीं कैंसिल कर रहे हैं। टैरिफ के बाद यह एक बड़ा झटका कहा जा रहा है। भारत बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और डायमंड अमेरिका का निर्यात करता है। ये आने वाले फेस्टिवल के सीजन में अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में साल भर की कुल बिक्री का लगभग आधा होता है।
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कितना गिरा हीरों का निर्यात?
कटे और पॉलिश किए हुए हीरों (CPD) का निर्यात 2021-22 में 9.86 अरब अमेरिकी डॉलर से कम होकर 2024-25 में 4.81 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। जानकारों कहते हैं कि कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के आगामी महीनों में भारत को बड़ा नुकसान होगा।
सबसे ज्यादा मार गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र पर पड़ेगा। वहीं, नौकरियों के लिहाज से देखा जाए, तो करीब एक लाख से ज्यादा नौकरियों पर संकट पैदा हो जाएगा।
हीरे की कटाई, पॉलिशिंग, सोने-चांदी को अलग करना और आभूषण के तौर पर तैयार करने में लाखों लोग लगे होते हैं। ऐसे लोगों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है, जो हीरा कंपनियों और व्यापारियों के यहां काम करते हैं। बता दें कि अप्रैल 2025 से पहले तक अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले सीपीडी और एलजीडी हीरों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाता था।