रुद्रप्रयाग: भगवान शिव के प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम की आगामी यात्रा को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने नई गाइडलाइन तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। इस बार सबसे बड़ा बदलाव मंदिर परिसर में मोबाइल फोन पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव है। यात्रियों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया जा सकता है। यह कदम धार्मिक आस्था के केंद्र में व्याप्त अराजकता को रोकने और भक्तों को शुद्ध भक्ति का अवसर प्रदान करने की दिशा में उठाया जा रहा है। जिला प्रशासन बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटी) के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर इस योजना को मूर्त रूप देने में जुटा हुआ है।
केदारनाथ धाम, जो समुद्र तल से 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मंदिर परिसर में सेल्फी, वीडियो बनाना और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियों ने शांति भंग करने के साथ ही सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया है। 2023 और 2024 की यात्रा में भीड़ के दौरान मोबाइल फोन से उत्पन्न अफरा-तफरी की कई घटनाएं सामने आईं थीं, जिसमें यात्रियों को चोटें तक लगीं। प्रशासन का मानना है कि मोबाइल प्रतिबंध से न केवल मंदिर की पवित्रता बनी रहेगी, बल्कि यात्रा मार्ग पर भी अनुशासन कायम होगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले ही यात्रियों को मोबाइल जमा कराने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
इस जिम्मेदारी को बीकेटी को सौंपा जाना प्रस्तावित है, जहां डिपॉजिट काउंटर स्थापित किए जाएंगे। जमा करने पर टोकन जारी किया जाएगा, जिसके बदले यात्रा समाप्ति पर फोन लौटाए जाएंगे।जिला मजिस्ट्रेट रुद्रप्रयाग ने बताया, “केदारनाथ यात्रा को और सुरक्षित बनाने के लिए हम नई गाइडलाइन पर काम कर रहे हैं। मोबाइल प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य भक्तों को पूर्ण रूप से भक्ति में लीन होने का मौका देना है। हम बीकेटी के साथ मिलकर व्यवहारिक समाधान निकालेंगे, ताकि यात्रियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।” इसी क्रम में अधिकारियों ने मंदिर समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी शुरू कर दी हैं। बीकेटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह प्रस्ताव स्वागतयोग्य है। हम पहले ही हेमकुंड साहिब और अन्य धामों की तर्ज पर मोबाइल डिपॉजिट सिस्टम लागू करने को तैयार हैं।
यह भी पढ़ें:महाशिवरात्रि पर केदारनाथ कपाट खुलने की तिथि घोषणा की उमंग, प्रशासन ने यात्रा तैयारियां तेज कीं
इससे मंदिर की गरिमा बनी रहेगी और सोशल मीडिया पर अनावश्यक वायरल वीडियो की भरमार रुकेगी।”यह व्यवस्था अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर होगी, जहां मोबाइल प्रतिबंध सफलतापूर्वक लागू है। रुद्रप्रयाग प्रशासन ने यात्रा से पहले हेलीपैड, रजिस्ट्रेशन सेंटर और आधार शिविरों पर भी जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है। नियम तोड़ने वालों पर 5,000 से 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, सीसीटीवी निगरानी और विशेष टास्क फोर्स तैनात की जाएगी। पर्यवेक्षक एसडीएम ने कहा, “यात्रा 2026 में अप्रैल अंत से शुरू होने वाली है। हम सभी सुझावों को शामिल कर गाइडलाइन अंतिम रूप देंगे।”उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। केदारनाथ यात्रा से न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ता है, बल्कि सांस्कृतिक एकता भी मजबूत होती है। लेकिन बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं। 2025 की यात्रा में 15 लाख से अधिक यात्री पहुंचे थे, जिसमें हादसों की संख्या भी चिंताजनक थी। मोबाइल प्रतिबंध से न केवल भीड़ प्रबंधन आसान होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी, क्योंकि प्लास्टिक वेस्टेज कम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भक्तों की आध्यात्मिक यात्रा को सार्थक बनाएगा।स्थानीय व्यापारी और पंडा समाज भी इस पहल का समर्थन कर रहे हैं। सोनप्रयाग के एक होटल मालिक ने कहा, “मोबाइल से भटकाव रुक जाएगा।
यात्री शांति से दर्शन करेंगे।” हालांकि, कुछ युवा यात्रियों ने चिंता जताई है कि इमरजेंसी कॉलिंग में दिक्कत हो सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इमरजेंसी के लिए विशेष हेल्पलाइन उपलब्ध रहेंगी।कुल मिलाकर, यह नई गाइडलाइन केदारनाथ यात्रा को एक नया आयाम देगी। जिला प्रशासन और बीकेटी के संयुक्त प्रयास से यह सुनिश्चित होगा कि बाबा केदार की ज्योतिर्लिंग यात्रा हर भक्त के लिए स्मरणीय बने। यात्रियों से अपील है कि वे इन नियमों का पालन करें और शुद्ध मन से दर्शन करें। आगामी दिनों में गाइडलाइन की अंतिम अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।
