चमोली: उत्तराखंड के चमोली में 28 अगस्त 2025 में हुए बादल फटने की घटना ने क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी, जिसमें निवासियों, संपत्तियों और बेजुबान जानवरों को जबरदस्त नुकसान झेलना पड़ा. आपको बता दें कि चमोली जिले के देवाल क्षेत्र के मोपाटा गांव में 28 अगस्त 2025 की रात करीब ढाई बजे बादल फटा, जिससे अचानक कच्चे मकानों, गौशालाओं और ग्रामीण संपत्तियों में मलबा घुस गया, इस आपदा में गांव के तारा सिंह और उनकी पत्नी लापता हो गए, वहीं विक्रम सिंह और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए, दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वही तेज बारिश के कारण गांव में लगभग 15 से 35 मवेशियों के दबने और कई घरों, दुकानों और कृषि भूमि के बर्बाद होने की सूचना मिली है।
राहत और बचाव कार्य जारी
सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की टीमें मौके पर पहुंचीं और तेजी से राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया. पूरे क्षेत्र में बारिश और मलबा आने के कारण बदरीनाथ हाईवे सहित कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं, जिससे राहत कार्यों में बाधाएं आईं। बचाव अभियान में कई परिवारों को वहाँ से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है, लापता लोगों की तलाश जारी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों के लिए संवेदना व्यक्त की है.
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इसी क्षेत्र के थराली ब्लॉक में भी एक सप्ताह पूर्व बादल फटने की तबाही हुई थी, जिसमें कई मकान व दुकानें मलबे में दब गई थीं और ग्रामीणों को व्यापक नुकसान हुआ था. मौसम विभाग ने अभी भी कई उत्तरी जिलों में भारी बारिश एवं बादल फटने की आशंका का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से सतर्क रहने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है. किसानों और ग्रामीणों को भी अग्रिम चेतावनी दी गई है कि किसी भी संकट के समय त्वरित सहायता ली जाए. यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि उत्तराखंड के पर्वतीय इलाके लगातार प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में हैं और मानसून के मौसम में ग्रामीणों को हमेशा सतर्क और तैयार रहना चाहिए।