अल्मोड़ा: रविवार दोपहर, जब उत्तराखण्ड का अल्मोड़ा जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता में डूबा था, तहसील देघाट के ग्राम चिन्तोली में एक भयानक हादसा हो गया। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के अचानक अनियंत्रित होकर पलटने से दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना न सिर्फ दो परिवारों की जिंदगी तबाह कर गई, बल्कि पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। मृतकों की पहचान 24 वर्षीय दर्शन सिंह और चंदन सिंह, दोनों चिन्तोली गांव के निवासी के रूप में हुई है।
हादसे की भयावह तस्वीर: अचानक पलटा वाहन, मची अफरा-तफरी
जानकारी के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 2 बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली गांव के संकरे रास्ते पर सामान लादकर चल रही थी। अचानक चालक का संतुलन बिगड़ गया और भारी वाहन सड़क किनारे खाई में पलट गया। ट्रॉली में सवार चारों युवक उसके नीचे दब गए। हादसे की आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण दौड़ पड़े। चीख-पुकार मच गई, महिलाएं रोने लगीं और पुरुष युवकों को बाहर निकालने में जुट गए।ग्रामीणों ने बताया कि रास्ता पहाड़ी होने के कारण टेढ़ा-मेढ़ा था और ट्रैक्टर की स्पीड ज्यादा होने से यह हादसा हुआ। हमने जैसे-तैसे दो घायलों को निकाला, लेकिन दर्शन और चंदन पहले ही प्राण त्याग चुके थे, एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया। ग्राम प्रहरी की सूचना पर देघाट थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। घायलों को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देघाट ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो युवकों को मृत घोषित कर दिया। शेष दो युवकों का इलाज चल रहा है, जिनकी हालत गंभीर है।
दो परिवारों पर विपदा का पहाड़: युवाओं का सपना अधूरा
यह हादसा चिन्तोली गांव के लिए बेहद हृदयविदारक है। दर्शन सिंह और चंदन सिंह दोनों 24 साल के थे – जिंदगी के उस मोड़ पर जहां सपने साकार होने वाले होते हैं। दर्शन परिवार का इकलौता बेटा था, जो खेती-बाड़ी के साथ-साथ गांव के छोटे-मोटे कामों में हाथ बंटाता था। उसके पिता एक साधारण किसान हैं, जो अब बुढ़ापे में अकेले रह जाएंगे। चंदन सिंह का परिवार भी गरीब किसान का था; वह शादी के प्रस्तावों पर विचार कर रहा था। दोनों की मौत से उनके माता-पिता टूट गए हैं। गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।परिवारजन बता रहे हैं कि दोनों युवक ट्रॉली में गांव के लिए राशन और अन्य सामान ला रहे थे। वे हंसमुख थे, गांव का गौरव थे। अब कौन संभालेगा घर?” दर्शन की मां रोते हुए बोलीं। स्थानीय लोग सहायता के लिए जुटे हैं, लेकिन यह दुख कभी न भुलाया जा सकेगा।
पुलिस जांच और प्रारंभिक कारण
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पलटे ट्रैक्टर का मुआयना किया। प्रारंभिक जांच में वाहन की अधिक गति, भारी लोड और खराब सड़क को हादसे का कारण बताया जा रहा है। एसपी अल्मोड़ा ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू हो गई है। ड्राइवर की लापरवाही की भी पड़ताल की जा रही है। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए। प्रशासन ने घायलों के इलाज का खर्च वहन करने का आश्वासन दिया है।
पहाड़ी इलाकों में बढ़ते हादसे: एक चिंताजनक प्रवृत्ति
उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिलों में ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसे आम हो चुके हैं। संकरी सड़कें, तेज ढलान और पुराने वाहन जानलेवा साबित हो रहे हैं। अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में पिछले एक साल में दर्जनों ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें 50 से ज्यादा मौतें हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरलोडिंग और लाइसेंस रहित चालक मुख्य कारण हैं।सरकार ने सख्ती का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। स्थानीय विधायक ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित परिवारों को 2-2 लाख की सहायता की घोषणा की। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़कों का चौड़ीकरण हो और वाहनों की जांच साप्ताहिक हो। यह हादसा प्रशासन के लिए है – गरीब किसानों के सहारे चलने वाले इन वाहनों को सुरक्षित बनाना जरूरी है।
चिन्तोली गांव आज शोकमग्न है। शाम को दोनों युवाओं का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। यह घटना न सिर्फ एक गांव की कहानी है, बल्कि पूरे पहाड़ की। युवा पीढ़ी खो रही है, परिवार बिखर रहे हैं। हमें सोचना होगा – विकास के नाम पर सड़कें सुधारें, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता दें।दर्शन और चंदन जैसे युवाओं की यादें गांव में बसी रहेंगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। उत्तराखण्ड को ऐसे हादसों से सबक लेना होगा।
