हल्द्वानी: हल्द्वानी के चौपाटी बाजार में बुधवार शाम एक ऐसी घटना घटी, जो सोशल मीडिया की दुनिया से सड़क पर उतर आई। दो महिला व्लॉगर्स सुनीता भट्ट और ज्योति अधिकारी के बीच लंबे समय से ऑनलाइन जुबानी जंग चल रही थी, जो अब रियल लाइफ में महाभारत बन गई। बाजार में दोनों का आमना-सामना होते ही कहासुनी से हाथापाई तक बात पहुंच गई। बीच बचाव में उतरी पुलिसकर्मियों के साथ भी झड़प हुई। आधे घंटे तक चले इस हंगामे को सैकड़ों लोग तमाशबीन बनकर देखते रहे। आखिरकार, पुलिस ने शांतिभंग के आरोप में दोनों को गिरफ्तार कर चालान कर दिया। कोतवाल विजय मेहता ने बताया कि आज दोनों को रिहा कर दिया जाएगा। ये विवाद सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था। सुनीता भट्ट और ज्योति अधिकारी उत्तराखंड के हल्द्वानी से जुड़ी व्लॉगर्स हैं, जो स्थानीय मुद्दों, सामाजिक टिप्पणियों और व्यक्तिगत वीडियोज के जरिए फॉलोअर्स कमाती हैं। दोनों के बीच डेढ़ महीने से ज्यादा समय से तनातनी चल रही थी।
ज्योति का आरोप है कि सुनीता उन्हें लगातार सोशल मीडिया पर टारगेट कर रही हैं। उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, व्यक्तिगत हमले किए और परेशान करने वाले वीडियो पोस्ट किए। ज्योति ने कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, “सुनीता मुझे डेढ़ महीने से टारगेट कर रही हैं। मेरी पर्सनल लाइफ पर हमला बोल रही हैं।”दूसरी तरफ सुनीता भट्ट ने भी ज्योति पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ज्योति जबरन विवाद खड़ा कर रही हैं। सोशल मीडिया पर दोनों ने एक-दूसरे को चैलेंज किया था। ज्योति ने कोतवाली से सीधे काठगोदाम थाना क्षेत्र के नैनीताल रोड स्थित चौपाटी बाजार पहुंच गईं। वहां सुनीता मौजूद थीं। चैलेंज स्वीकार करते हुए दोनों आमने-सामने आ गईं। शुरू में जुबानी हमले हुए, लेकिन जल्द ही मामला बिगड़ गया। गुस्से में दोनों ने एक-दूसरे पर हाथ उठा दिए।
बाजार में अफरा-तफरी मच गई। लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन कोई बीच-बचाव करने आगे नहीं आया।पुलिस को खबर मिलते ही फोर्स मौके पर पहुंची। महिला कांस्टेबलों ने दोनों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन नौबत धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक व्लॉगर पुलिसकर्मियों से उलझ रही हैं। हाथापाई के दौरान ज्योति अपने परिवार के साथ थीं, जो हंगामे को और भड़काने का काम कर रहा था। आधे घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। कोतवाल विजय मेहता ने कहा, “शांतिभंग के आरोप में चालान किया गया है। दोनों को आज छोड़ दिया जाएगा, लेकिन समझाया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।”ये घटना सोशल मीडिया के दोहरे चेहरे को उजागर करती है। जहां एक तरफ ये प्लेटफॉर्म आवाज को ताकत देते हैं, वहीं अनियंत्रित विवाद सड़क पर हिंसा का रूप ले लेते हैं। उत्तराखंड जैसे क्षेत्र में जहां सोशल मीडिया लोकल न्यूज और सामाजिक मुद्दों का बड़ा माध्यम बन चुका है, व्लॉगर्स की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
सुनीता और ज्योति जैसे केस बढ़ रहे हैं, जहां पर्सनल एग्रेशन पब्लिक स्पेस में फैल जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन ट्रोलिंग को साइबर लॉ के तहत सख्ती से हैंडल किया जाना चाहिए। पुलिस ने दोनों पक्षों के सोशल मीडिया अकाउंट्स चेक किए हैं, जिसमें आपत्तिजनक पोस्ट्स मिले हैं।हल्द्वानी प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में सोशल मीडिया विवादों को सड़क पर न ले जाया जाए। ये घटना व्लॉगिंग कम्युनिटी के लिए सबक है। फॉलोअर्स तो बढ़ सकते हैं, लेकिन कानून हाथ में लेना महंगा पड़ सकता है। फिलहाल, दोनों व्लॉगर्स रिहा हो रही हैं, लेकिन उनका ऑनलाइन बैटल अब थमेगा या और भड़केगा, ये देखना दिलचस्प होगा। उत्तराखंड की इस ‘डिजिटल महाभारत’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वर्चुअल दुनिया की जंग रियल वर्ल्ड में तबाही मचा सकती है।
