देहरादून: उत्तराखंड में अब परिवहन विभाग से जुड़े कार्यों के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने की परेशानी जल्द खत्म होने वाली है। राज्य का परिवहन विभाग तेजी से डिजिटल बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रहा है और इसी क्रम में आधार आधारित वेरिफिकेशन प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह नई व्यवस्था आम नागरिकों को बड़ी राहत देने वाली मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए कई जरूरी सेवाएं अब घर बैठे ही पूरी की जा सकेंगी।
डिजिटलीकरण के इस दौर में सरकारी सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। परिवहन विभाग भी अब पीछे नहीं है और अपनी सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन करने की दिशा में काम कर रहा है। इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल, दस्तावेज अपडेट, डुप्लीकेट कॉपी प्राप्त करने और पते में बदलाव जैसे कई कार्य बिना कार्यालय गए ही पूरे किए जा सकेंगे।
परिवहन विभाग के अपर आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, विभाग की “सारथी” सेवाओं को आधार आधारित वेरिफिकेशन से जोड़ा जा रहा है। इस तकनीकी बदलाव के लिए नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) का सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अगले 15 से 20 दिनों के भीतर यह सुविधा शुरू होने की संभावना है, जिससे नागरिक ओटीपी के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत आधार से जुड़े डेटा का उपयोग कर आवेदक की फोटो, हस्ताक्षर और अन्य जरूरी विवरण स्वतः सत्यापित हो जाएंगे। इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि कागजी कार्यवाही भी काफी हद तक कम हो जाएगी। अभी तक इन कामों के लिए लोगों को कई बार कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी होती थी।
हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ प्रक्रियाएं अभी भी ऑफलाइन रहेंगी। उदाहरण के लिए, नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या वाहन श्रेणी में बदलाव के लिए ड्राइविंग टेस्ट देना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए आवेदकों को निर्धारित टेस्ट सेंटर पर उपस्थित होना होगा। यानी पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन नहीं होगी, लेकिन अधिकांश काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो जाएंगे। इस नई प्रणाली का एक और बड़ा फायदा यह होगा कि डिजिटल दस्तावेज तुरंत डाउनलोड किए जा सकेंगे। इससे लोगों को अपने दस्तावेज पाने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, यदि किसी को हार्ड कॉपी की जरूरत होगी, तो फिलहाल उसे प्राप्त करने के लिए कार्यालय जाना पड़ सकता है।
परिवहन विभाग भविष्य में इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। विभाग की योजना है कि दस्तावेजों की होम डिलीवरी शुरू की जाए, जिसके लिए डाक विभाग या निजी कंपनियों के साथ करार किया जा सकता है। पहले इस तरह की सेवाओं में पेंडेंसी और डिलीवरी से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं, लेकिन अब नई तकनीक के साथ इन्हें सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। कुल मिलाकर, यह पहल उत्तराखंड में सरकारी सेवाओं को आधुनिक और नागरिकों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य विभागों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
