रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के हृदय स्थल, बाबा केदारनाथ की पावन नगरी में शीतकाल का सत्र चल रहा है। यहां प्रकृति ने अपना सबसे कठोर रूप धारण कर लिया है। तापमान माइनस 16 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है, बर्फीली हवाएं चेहरे को चीर रही हैं, और चारों ओर सफेद चादर बिछी हुई है। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों के बीच भी उत्तराखंड पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के बहादुर जवान धाम की सुरक्षा में डटे हुए हैं। उनका कर्तव्य पालन न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था का जीवंत प्रमाण भी है।मंगलवार को हुई जोरदार बर्फबारी ने केदारनाथ धाम के आसपास के इलाकों को पूरी तरह से अपने आगोश में ले लिया। पांच फीट ऊंची बर्फ जमा हो गई, जिससे संपर्क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गए।
बुधवार को जब मौसम ने थोड़ी राहत दी और आकाश साफ हुआ, तो ITBP और उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने तुरंत कमर कस ली। बर्फ हटाने के लिए वे जुट गए। हाथों में कुदाल, फावड़े और बर्फ हटाने वाली मशीनें थामे, उन्होंने न सिर्फ धाम तक पहुंचने वाले मुख्य मार्गों को साफ किया, बल्कि अपनी बैरक के आसपास भी बर्फ की मोटी परत हटा दी। यह दृश्य देखकर मन में देशभक्ति की भावना उमड़ आती है।केदारनाथ धाम शीतकाल में बंद रहता है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से हमेशा सतर्क रहना जरूरी होता है। ITBP के जवान, जो हिमालयी सीमाओं के विशेषज्ञ हैं, यहां तैनात रहते हैं। ये जवान ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में प्रशिक्षित होते हैं, जहां ऑक्सीजन की कमी और ठंड की मार सहन करना रोज की चुनौती है। उत्तराखंड पुलिस के जवान भी इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
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तापमान इतना गिरा हुआ है कि सांस लेना भी दूभर हो जाता है, लेकिन जवानों का हौसला डगमगाता नहीं। वे रात-दिन गश्त करते हैं, धाम की परिधि में नजर रखते हैं और किसी भी संभावित खतरे को भांप लेते हैं।इन जवानों का जीवन बेहद कठिन है। बैरक में रहते हुए भी बर्फ की ठंड उन्हें घेर लेती है। विशेष इंसुलेटेड कपड़े, हीटिंग उपकरण और ऊंचाई पर खाने-पीने की व्यवस्था के बावजूद चुनौतियां कम नहीं होतीं। फिर भी, वे मुस्कुराते हुए कर्तव्य निभाते हैं। एक ITBP जवान ने बताया, “यहां का मौसम कठोर है, लेकिन भगवान केदार का आशीर्वाद और देशभक्ति हमें ताकत देती है।” उत्तराखंड पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, हमारा उद्देश्य है कि जब ग्रीष्मकाल में श्रद्धालु आएं, तो धाम पूरी तरह सुरक्षित हो। यह घटना केदारनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।
2013 की आपदा के बाद से यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। ITBP की 59वीं बटालियन और उत्तराखंड पुलिस की विशेष टीमें हमेशा अलर्ट रहती हैं। ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट इमेजरी और वायरलेस संचार प्रणाली से निगरानी की जाती है। शीतकाल में बर्फबारी एक सामान्य घटना है, लेकिन जवानों की तत्परता से कोई बड़ा हादसा नहीं होता। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद मार्ग साफ करने में मात्र कुछ घंटे लगे, जो उनकी दक्षता का प्रमाण है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में प्रकृति की मार झेलना पुलिसकर्मियों का हिस्सा है। केदारनाथ यात्रा विश्व प्रसिद्ध है, लाखों श्रद्धालु आते हैं। शीतकाल में भी सुरक्षा चाक-चौबंद रखना जरूरी है, ताकि चोरी, अवैध घुसपैठ या अन्य घटनाओं को रोका जा सके। इन जवानों का बलिदान अक्सर चर्चा से दूर रहता है, लेकिन वे ही असली हीरो हैं।
सरकार और प्रशासन को इनके लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, जैसे आधुनिक हीटिंग सिस्टम और स्वास्थ्य सुविधाएं।केदारनाथ धाम न सिर्फ धार्मिक महत्व का केंद्र है, बल्कि पर्यटन और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी प्रतीक है। ITBP और उत्तराखंड पुलिस के इन वीर जवानों का साहस हर भारतीय को गर्व से भर देता है। ठंडी बर्फीली रातों में भी जागते हुए वे देश की रक्षा कर रहे हैं। आइए, हम सब इनके योगदान को सलाम करें और प्रार्थना करें कि बाबा केदार इन्हें हमेशा सुरक्षित रखें। यह शीतकालीन साहस की कहानी हर युवा को प्रेरित करेगी।