द्वाराहाट: द्वाराहाट के प्रसिद्ध दूनागिरी क्षेत्र में आज बसन्त पंचमी को हुई साल की पहली बर्फबारी ने स्थानीय लोगों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ा दी। लंबे समय से सूखे सर्दी के मौसम के बाद यह बर्फबारी किसी उत्सव से कम न थी। अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट में स्थित इस ऊंचे पहाड़ी इलाके में सफेद चादर बिछ गई, जिसने प्रकृति का एक मनमोहक नजारा पेश किया।
बर्फबारी का मनोरम दृश्य
दूनागिरी मंदिर के आसपास और आसपास के पहाड़ों पर मोटी बर्फ की परत जम गई। पेड़-पौधे, घर, खेत-खलिहान सब सफेद रंग में रंग गए। स्थानीय लोगों द्वारा कहा जा रहा है कि इस बर्फबारी को देखकर बचपन की यादें ताजा हो गईं। बच्चों ने तो पहली बार इतनी बर्फ देखी। पर्यटक भी इस मौके पर उमड़ पड़े, जो सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो शेयर कर रहे हैं। ठंड बढ़ने से मैदानी इलाकों में भी शीतलहर का असर दिखा।
यह भी पढ़ें:23 जनवरी को भारी बर्फबारी! ऑरेंज अलर्ट, उत्तराखंड में 5 दिन बारिश-हिमपात का धमाल
स्थानीय लोगों की खुशी
लंबी प्रतीक्षा के बाद यह बर्फबारी ग्रामीणों के लिए आशीर्वाद साबित हुई। किसान कहते हैं, कि बर्फ से ग्लेशियर मजबूत होंगे, गर्मियों में पानी की कमी न होगी। महिलाएं और बच्चे बर्फ के गोले बनाकर खेल रहे थे। यह मौसम न केवल ठंड लाया, बल्कि सामुदायिक उत्साह भी। स्कूलों में छुट्टी होने से बच्चों के चेहरे खिल उठे।
पर्यटन को नई जान
दूनागिरी, जो वैष्णो शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है, अब पर्यटकों के लिए स्वर्ग बन गया। द्वाराहाट से मात्र 15 किमी दूर यह स्थान पहले से ही आध्यात्मिक महत्व रखता है। बर्फबारी के बाद ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक रखने वाले सैलानी पहुंच रहे हैं। स्थानीय होटल और गेस्ट हाउस फुल हो चुके। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और बर्फबारी की चेतावनी दी है, जिससे पर्यटन उद्योग को राहत मिली।
मौसम का प्रभाव और सावधानियां
उत्तराखंड के अन्य हिस्सों जैसे केदारनाथ, मसूरी में भी बर्फबारी हुई, लेकिन दूनागिरी की यह पहली बर्फ ने विशेष महत्व रखा। तापमान शून्य से नीचे चला गया, जिससे मैदानों में कोहरा बढ़ा। ग्रामीणों ने ऊनी कपड़े, गर्म भोजन पर जोर दिया। प्रशासन ने लाइफलाइन सड़कों को साफ करने के लिए मशीनें तैनात कीं। जलवायु परिवर्तन के दौर में यह बर्फबारी ग्लेशियरों के लिए शुभ संकेत है। दूनागिरी मां का मंदिर सदियों से भक्तों का केंद्र रहा। बर्फबारी के बीच पूजा-अर्चना ने आध्यात्मिकता जोड़ी। स्थानीय लोकगीत गूंजे, जहां बर्फ को देवी का आशीर्वाद माना गया। यह मौका सामाजिक एकता का भी प्रतीक बना। आने वाले दिनों में क्षेत्र में धार्मिक उत्सव आयोजित हो सकते हैं। कुल मिलाकर, यह बर्फबारी ने 2026 की सर्दी को यादगार बना दिया।
